दिल्ली : दिल्ली में अखिल विश्व गायत्री परिवार का तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में 2 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। राज्यों से आने वाले प्रतिनिधिमंडल, लोक नृत्य, समूह गीत और बैंड की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी। कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में हाईटेक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और परिसर के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
आयोजकों के मुताबिक, समारोह में शामिल होने वाले लोगों की सुविधा, प्रवेश और निकास व्यवस्था, स्वयंसेवकों के समन्वय और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में हाईटेक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और परिसर के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आयोजन के पहले दिन सुबह ज्योति कलश के आगमन के साथ महोत्सव की शुरुआत होगी। तीन दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्टेडियम के भीतर बड़ी LED स्क्रीन भी लगाई गई हैं। इनके जरिए प्रतिभागी कार्यक्रम को स्टेडियम के अलग-अलग हिस्सों से देख सकेंगे।
पीटीआई/भाषा के हवाले से डॉ. चिन्मय पंड्या ने बताया कि समारोह की ज्यादातर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। स्वयंसेवक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयोजन को आध्यात्मिक अनुशासन, सामूहिक साधना और बेहतर प्रबंधन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
पहले-दूसरे दिन क्या होगा?
पहले दिन शनिवार शाम का एक प्रमुख सत्र नारी जागरण को समर्पित होगा। 1 नवंबर को महोत्सव में देश की सांस्कृतिक विविधता को केंद्र में रखकर विशेष कार्यक्रम होगा। सुबह गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों की ओर से प्रज्ञा योग की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद सुबह 9:45 से 10:30 बजे तक 'भारत- अनेकता में एकात्मता' कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें विभिन्न राज्यों से आए सांस्कृतिक दल अपने लोक नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां देंगे। दिन का समापन शाम 7 बजे दीप यज्ञ के साथ होगा।
तीसरे दिन शोभायात्रा के साथ होगा समापन
महोत्सव के अंतिम दिन 2 नवंबर को भी गीत और नृत्य के कार्यक्रम होंगे। दोपहर 2 से 4 बजे तक विदाई सत्र आयोजित होगा, जिसका नाम 'ज्योति कभी बुझेगी नहीं' रखा गया है। इसमें बैंड और विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दल प्रस्तुतियां देंगे। शाम 4 बजे शोभायात्रा के साथ तीन दिवसीय आयोजन का समापन होगा।
