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Jammu में बनेगा पहला 'मानव दूध बैंक', नवजातों को हॉस्पिटल में मिलेगा पोषक

जम्मू के एक एक सरकारी अस्पताल में मानव दूध बैंक स्थापित किया जाएगा। गांधी नगर इलाके में सरकारी मातृत्व एवं शिशु देखभाल अस्पताल में 47.20 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है।

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जम्मू में बनेगा मानव दूध बैंक

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

जम्मू: आम तौर पर मानव दूध बैंक के तौर पर पहचाने जाना वाला पहला ‘कॉम्प्रीहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (सीएलएमसी) इस साल के अंत तक यहां एक सरकारी अस्पताल में कार्य करना शुरू करेगा। अधिकारी ने बताया कि सीएलएमसी बीमार, कमजोर और समय-पूर्व जन्मे बच्चों को बेहतर उपचार मुहैया कराने में मदद करेगा। इस केंद्र का निर्माण जम्मू के गांधी नगर इलाके में सरकारी मातृत्व एवं शिशु देखभाल अस्पताल में 47.20 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले साल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस परियोजना को मंजूरी दी थी।

कर्मियों की होगी भर्ती

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक अरुण शर्मा ने बताया कि सीएलएमसी के लिए अस्पताल की तीसरी मंजिल पर जगह की पहचान की गई है और हमें पिछले महीने धन प्राप्त हुआ है। दूध बैंक को उचित तरीके से संचालित करने के लिए चिकित्सकों, परामर्शकों और प्रबंधकों समेत विभिन्न कर्मियों की भर्ती की जाएगी।

नवजातों को मिलेगा पोषक

शर्मा ने बताया कि इस केंद्र को स्तनपान कराने वाली माताओं के सहारे चलाया जाएगा या ऐसी माताएं इसमें दूध का दान कर सकती हैं जिन्होंने अपने नवजात बच्चे को खो दिया है। उन्होंने कहा कि दूध एकत्र कर उसकी वैज्ञानिक रूप से जांच की जाएगी और केंद्र में उसे पाश्चरीकृत किया जाएगा तथा फिर नवजातों को पिलाया जाएगा।

अस्पताल में हाल में एक बच्चे को जन्म देने वाली कंचन ने ऐसा केंद्र बनाए जाने का स्वागत किया और कहा कि यह सुविधा उन नवजातों के लिए काफी फायदेमंद होगी जिनकी मां जन्म के समय उन्हें दूध नहीं पिला पाती। उन्होंने कहा कि मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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