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नोएडा सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत मामले में बड़ी कार्रवाई; ट्रैफिक जेई बर्खास्त, अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

युवराज मेहता के परिवार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने न तो रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही सर्विस रोड के किनारे नालियों को ढका था। मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि घने कोहरे के बीच सुरक्षा उपायों की कमी के कारण उनके बेटे की मौत हुई।

नोएडा सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत मामले में लेटेस्ट अपडेट।

नोएडा सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत मामले में लेटेस्ट अपडेट।

ग्रेटर नोएडा में सिस्टम की लापरवाही के चलते 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भयावह मौत मामले में पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज कर ली है। मृतक युवराज के पिता की तहरीर पर यह एफआईआर दर्ज हुई है। साथ ही नोएडा प्राधिकरण ने लापरवाही को गंभीर मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरी है।

अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

प्राधिकरण ने सेक्टर-150 क्षेत्र में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही नोएडा ट्रैफिक सेल में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

लोटस बिल्डर को लेकर भी सख्त रुख

नोएडा प्राधिकरण ने मामले में लोटस बिल्डर को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने बिल्डर को किए गए आवंटन, निर्माण की अनुमति और मौके पर अपनाए गए सुरक्षा मानकों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण स्थल पर नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने इस मामले में साफ संदेश देते हुए कहा है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों से किसी भी सूरत में समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि नोएडा में चल रही सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का दोबारा सुरक्षा ऑडिट किया जाए। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। हादसे से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है और जहां भी लापरवाही सामने आएगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि 16 जनवरी की रात को सेक्टर 150 के नजदीक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार ड्रेनेज की बाउंड्री से टकराकर 30 फीट गड्ढे में गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना से खराब सड़क सुरक्षा उपायों को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा है।

एफआईआर में किसका-किसका नाम?

बता दें कि मामले में जिस जमीन पर हादसा हुआ, उसके मालिक दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ग्रेटर नोएडा के सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने एफआईआर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृतक के पिता की शिकायत पर नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना) और 125 (जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत प्लॉट के मालिक दो बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

इसके अलावा, युवराज मेहता के परिवार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने न तो रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही सर्विस रोड के किनारे नालियों को ढका था। मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि घने कोहरे के बीच सुरक्षा उपायों की कमी के कारण उनके बेटे की मौत हुई।

घटना और बचाव अभियान के बारे में भी बताया

घटना और राहत बचाव अभियान के बारे में भी हेमंत उपाध्याय ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युवराज को बचाने के लिए पुलिस ने हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन पानी की गहराई, अंधेरा और घना कोहरा होने के कारण बचाव कार्य मुश्किल हो गया। हेमंत उपाध्याय ने कहा कि हमें डर था कि अगर कोई उसे बचाने के लिए पानी में उतरता तो और भी जानमाल का नुकसान हो सकता था। हमारे लिए स्थिति और भी बदतर हो सकती थी। वहीं, नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सर्वेश कुमार ने कहा कि जांच के दौरान पाई गई किसी भी लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी और जहां जरूरी होगा, कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

70 फुट गहरे गड्ढे में जा गिरी कार

अधिकारियों के अनुसार, घने कोहरे और सड़क पर रिफ्लेक्टर न होने के कारण उसकी कार दो ड्रेनेज बेसिन को अलग करने वाली ऊंची जगह से टकरा गई। इसके बाद गाड़ी पानी से भरे 70 फुट गहरे गड्ढे में गिर गई। चश्मदीदों ने बताया कि जैसे ही कार पानी में डूबी, युवराज ने मदद के लिए आवाज दी। बचाव कार्य तुरंत शुरू हो गया, स्थानीय पुलिस, गोताखोर और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। युवराज के पिता राजकुमार मेहता भी ऑपरेशन के दौरान मौजूद थे। लगभग पांच घंटे बाद, टीम मेहता और उनकी कार को खाई से बाहर निकालने में कामयाब रही, लेकिन उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया।

हादसे की पूरी टाइमलाइन

रात करीब 12:00 बजे

युवराज सेक्टर-150 के टाटा यूरिका पार्क के पास पहुंचे। घने कोहरे के कारण सड़क किनारे स्थित खाली प्लॉट का खुला बेसमेंट दिखाई नहीं दिया। कार नाले की बाउंड्री तोड़ते हुए सीधे बेसमेंट में जा गिरी, जहां करीब 30 फीट तक पानी भरा हुआ था।

12:10-12:20 बजे

युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकले और कार की छत पर चढ़ गए। उन्होंने मोबाइल फोन से अपने पिता राजकुमार मेहता को कॉल कर पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि पापा, मुझे बचा लो। मुझे अभी नहीं मरना है।

12:20 बजे

पिता ने तुरंत डायल-112 पर सूचना दी और खुद भी चंद मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गए। क्योंकि घटनास्थल युवराज के घर से महज 500 मीटर की दूरी पर था।

12:50 बजे

स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। युवराज की मदद के लिए पुकार सुनाई दे रही थी, लेकिन घने कोहरे के कारण उसे देखना लगभग नामुमकिन था। वहां से गुजर रहे मोहिंदर ने सबसे पहले बचाव का प्रयास किया और बर्फीले पानी में कूदकर 30 मिनट तक खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

रात 1:15 बजे

एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची। इस दौरान युवराज लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे। घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मियों को तैरना नहीं आता था, इसलिए क्रेन बुलाई गई, लेकिन तुरंत कोई भी पानी में नहीं उतरा।

करीब 80 मिनट बाद

धीरे-धीरे युवराज की आवाज कमजोर पड़ती गई और फिर पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद कार पूरी तरह पानी में डूब गई।

सुबह करीब 4:30 बजे

लंबे प्रयासों के बाद रेस्क्यू टीम ने करीब पांच घंटे बाद युवराज का शव पानी से बाहर निकाला।

चश्मदीद लोगों ने बयां किया भयावह पलों का हाल

दोस्तों और प्रत्यक्षदर्शियों ने उन भयावह पलों का वर्णन किया। युवराज के दोस्त पंकज टोकस ने याद करते हुए बताया, 'वह कार की छत पर खड़े होकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था। घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मियों को तैरना नहीं आता था, इसलिए क्रेन बुलाई गई, लेकिन तुरंत कोई भी पानी में नहीं उतरा।' दमकल विभाग और आपदा राहत दल को बुलाया गया। राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) के स्थानीय गोताखोरों ने बचाव कार्य में मदद करने का प्रयास किया, लेकिन 30 फुट गहरे गड्ढे में बचाव कार्य करने के लिए उनके पास आवश्यक उपकरण नहीं थे। इसके बाद गाजियाबाद से राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) को बुलाया गया, जो लगभग एक घंटे बाद मौके पर पहुंचा।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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