31 जुलाई 2026 आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि थी और बड़ी संख्या में करदाताओं ने समय रहते अपना रिटर्न जमा कर दिया। भारत में नौकरीपेशा और कारोबार करने वाले अधिकांश लोगों के लिए आय के अनुसार इनकम टैक्स देना और हर साल ITR दाखिल करना अनिवार्य होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा राज्य भी है, जहां के पात्र मूल निवासियों को अपनी आय पर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता? यह सुविधा भारतीय संविधान के तहत मिले विशेष प्रावधानों के कारण उपलब्ध है।
सिक्किम के पात्र मूल निवासियों को मिलती है टैक्स छूट
भारत का पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ऑर्गेनिक खेती के लिए जाना जाता है, हालांकि इसकी एक और खास पहचान यह है कि यहां के पात्र मूल निवासियों को आयकर से छूट प्राप्त है। यह छूट सभी लोगों को नहीं, बल्कि केवल उन लोगों को मिलती है जो कानून के अनुसार सिक्किम के पात्र मूल निवासी हैं।
क्या दूसरे राज्य के लोग भी उठा सकते हैं इसका लाभ?
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे राज्य से जाकर सिक्किम में बस जाए, तो क्या उसे भी इनकम टैक्स से छूट मिल जाएगी? इसका जवाब नहीं है। यह सुविधा केवल सिक्किम के पात्र मूल निवासियों के लिए है। दूसरे राज्यों से जाकर बसने वाले लोगों को सामान्य आयकर नियमों के अनुसार ही टैक्स देना होता है।
किस नियम के तहत मिलती है छूट?
सिक्किम के पात्र मूल निवासियों को यह राहत आयकर अधिनियम की धारा 10(26AAA) के तहत दी गई है। इस प्रावधान के अनुसार, राज्य के भीतर अर्जित आय पर उन्हें इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। खास बात यह है कि इस छूट के लिए आय की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है। यानी पात्र मूल निवासी सिक्किम में रहकर कितनी भी आय अर्जित करें, उस पर उन्हें आयकर नहीं देना होगा।
सिक्किम को क्यों मिली यह विशेष सुविधा?
इस टैक्स छूट की वजह सिक्किम का भारत में विलय है। जब सिक्किम भारत का हिस्सा बना, तब राज्य के लिए कुछ विशेष संवैधानिक प्रावधान किए गए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371(F) के तहत सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया, जिसके आधार पर वहां के पात्र मूल निवासियों को आयकर में यह विशेष छूट प्रदान की गई।
