दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के पुलिस थानों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों और मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की कथित कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को छह सप्ताह के भीतर दिल्ली के सभी थानों का सर्वे कर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को यह पता लगाने के लिए सर्वे करने का आदेश दिया कि राजधानी के कितने पुलिस थानों में कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें उपलब्ध हैं। साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि महिला पुलिसकर्मियों और महिला आगंतुकों के लिए इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि स्थिति रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, डिस्पोजल के लिए इंसीनरेटर और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भविष्य में क्या योजनाएं बनाई गई हैं।
यह जनहित याचिका 'जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन' ने अपनी महासचिव मुस्कान सिंह बांकुरा के माध्यम से दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है।
आरटीआई से सामने आई थानों की हकीकत
याचिका में कहा गया है कि जुलाई और अगस्त 2025 के बीच सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दिल्ली पुलिस के सभी 18 जिलों और इकाइयों से प्राप्त जवाबों में पता चला कि सैकड़ों पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों, कचरा निस्तारण के लिए इंसीनरेटर और मेंस्ट्रुअल हाइजीन के लिए अलग बजट का लगभग पूरी तरह अभाव है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हजारों महिला पुलिसकर्मियों को बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं के बिना काम करने के लिए मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मिले समानता, गरिमा, स्वास्थ्य और निजता के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 42 और 47 का भी हवाला दिया गया है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को सभी पुलिस थानों में कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इंसीनरेटर लगाने, उनके रखरखाव के लिए बजट आवंटित करने और महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्वच्छ एवं अलग शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए। मामले में जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की ओर से अधिवक्ता कर्णिका बहुगुणा, पूजा कुशवाहा, विपाशा जैन और आदर्श सिंह ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
