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खौफ के साए में हिल स्टेशन! माउंटआबू में बढ़ता जा रहा है जंगली जानवरों का आतंक

मांउटआबू में जंगली जानवरों के हमले का खौफ बढ़ता जा रहा है। अब यहां भालुओं के अलावा तेंदुए भी सड़कों पर नजर आने लगे है। यहां के निवासियों ने इसे लेकर वन विभाग को आरोपों के कटघरे में खड़ा किया है।

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माउंटआबू में बढ़ता जा रहा है जंगली जानवरों का खौफ

नई दिल्ली: राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंटआबू में जंगली जानवरों का खौफ बढ़ता जा रहा है। यहां जंगली भालुओं के शहर में आने और उनके आक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे है। माउंट आबू में सड़कों पर आकर भालू हमला करने लगे है। कुछ समय पहले ही भालू के आक्रमण से एक युवक के घायल होने की खबर सामने आई थी।

ऐसे बताया जा रहा है कि दरअसल भालू कुछ खाने की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं और अब वो सड़कों पर आने लगे है लिहाजा डर का वातावरण बढ़ता जा रहा है । यहां अब जंगलों से भालू माउंट आबू के मुख्य मार्गों पर कभी दिलवाड़ा तो कभी नीलकंड रोड तो कभी सालगांव रोड पर नजर आने लगे है। जब अकेले इंसान मिल जाता है चाहे महिला हो या पुरुष तो भालू उन पर हमला कर देते हैं ।

खाने की तलाश में आते हैं जानवर

माउंट आबू के जंगलों में अब भालू तेंदुए और वन्य जीवों के खाने के लिए कुछ नहीं बचा है और इसके कारण वन्यजीव शहर का रुख करने लगे हैं । कभी भालू तो कभी तेंदुए मुख्य मार्गों पर चले आते हैं और लोगों में भय बनने लगा है कि कहीं वे उन पर हमला नहीं कर दे । रात्रि में तेंदुए का मूवमेंट भी शहर की तरफ दिखाई देने लगा है और इन घटनाओं पर वन विभाग मौन है । माउंट आबू नगर पालिका क्षेत्र सेंचुरी से बाहर है उसके बावजूद वन विभाग सनसेट पॉइंट पर जो पहले नगर पालिका का था वहां यात्रियों से टैक्स वसूलता है ।

वन विभाग पर लोगों के आरोप

नागरिकों का आरोप है कि माउंट आबू में वन विभाग करोड़ों रुपए कमाता है । नगर पालिका क्षेत्र में उनके द्वारा यात्रियों से करोड़ों रुपए वसूले जाते हैं लेकिन यह पैसा कहां जाता है इसका कोई हिसाब नहीं है।

देखरेख और विकास नहीं होने का आरोप

माउंट आबू में वन विभाग का नाके पर यात्री कर लिया जाता है वह शाम 6:00 बजे खुलता है जबकि पूरे देश में जहां पर सेंचुरी का टैक्स लिया जाता है वहां 5:00 बजे इस प्रकार के नाका बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि माउंट आबू में नगर पालिका क्षेत्र में किसी प्रकार का नाका लगाया ही नहीं जा सकता क्योंकि वह सेंचुरी से बाहर है । अवैध रूप से एक एक वन विभाग के अधिकारी ने यह टेक्स अपने मर्जी से लगा दिया था क्योंकि नगर पालिका उन्हें वाहन कर का 30% नहीं दे रहा था। एक और वन विभाग करोड़ों रुपए अवैध रूप से शाम 6:00 बजे बाद यात्री कर की वसूली करता है करोड़ों रुपए कमाता है फिर भी ना जंगल में पेड़ों की रखवाली है ,ना उनका सुधार होता दिख रहा है।

माउंट आबू में बीएसएफ का मुख्य स्थान है गुरु शिखर जिस पर सेना के अधिकारियों सैनिकों को जाना पड़ता है । राज्य सरकार ने हाल ही में गुरु शिखर मार्ग पर करोड़ों रुपए पीडब्ल्यूडी को स्वीकृत किए लेकिन आरोप है कि सड़क निर्णाम से अटकाने में माउंट आबू के वन विभाग के अधिकारियों का हाथ रहा है। जहां अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हो वहां यहां विकास क्यों बाधित है ।

लोगों में वन विभाग के प्रति नाराजगी

माउंट आबू के लोगों में वन विभाग के प्रति नाराजगी का बढ़ना स्वाभाविक है । माउंट आबू के लोगों ने विभिन्न ज्ञापनों के माध्यम से गुरु शिखर सड़क का कार्य पूर्ण करने की मांग की है । लोगों का यह भी कहना है कि हम जहां देश में तिरंगा यात्राएं निकाल रहे हैं हम अपने सैनिकों को इस प्रकार से भी सुविधा नहीं दे सकते तो तिरंगा यात्रा निकालने का कोई मतलब दिखाई नहीं देता।

पूरे देश में 5:00 बजे शाम को सेंचुरी क्षेत्र में वन विभाग के यात्री कर नाके बंद होने के आदेश है लेकिन क्योंकि माउंट आबू का सनसेट पॉइंट नगर पालिका क्षेत्र में है और नगर पालिका क्षेत्र 7 किलोमीटर वन्य अभ्यारण्य से बाहर है फिर भी अवैध रूप से कई सालों यात्री कर वसूला जा रहा है जिससे करोड़ों की वन विभाग को आय होती है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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