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ED Day 2026 : मनी लॉन्ड्रिंग पर सबसे बड़ी मार, दुनिया की मजबूत वित्तीय जांच एजेंसी बनी ईडी; क्या बोले MOS पंकज चौधरी

पंकज चौधरी ने विपक्ष और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग हमेशा कहते हैं कि मोदी सरकार ने ईडी को बहुत ज्यादा शक्तियां दे दी हैं, लेकिन वे आधा सच बताते हैं। उन्होंने कहा कि ईडी को ताकत इसलिए दी गई ताकि मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, बेनामी संपत्ति, बैंक घोटाले और टेरर फंडिंग जैसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

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ईडी का 70वां स्थापना दिवस पर बोलते केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी

नई दिल्ली में 70वें प्रवर्तन दिवस (ED Day) के मौके पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ईडी आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में एक मजबूत वित्तीय जांच एजेंसी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। अपने संबोधन में पंकज चौधरी ने कहा कि 1 मई 1956 को बनी ईडी ने पिछले 70 सालों में लंबा सफर तय किया है और खासकर पिछले कुछ वर्षों में उसकी कार्यक्षमता और प्रभाव काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ईडी का काम सिर्फ विदेशी मुद्रा कानूनों जैसे फेरा और फेमा के पालन तक सीमित था, लेकिन बाद में सरकार ने उसे मनी लॉन्ड्रिंग रोकने की जिम्मेदारी भी दी और एजेंसी इस भरोसे पर पूरी तरह खरी उतरी।

“ईडी को किसी को निशाना बनाने नहीं, आर्थिक अपराध रोकने की ताकत मिली”

पंकज चौधरी ने विपक्ष और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग हमेशा कहते हैं कि मोदी सरकार ने ईडी को बहुत ज्यादा शक्तियां दे दी हैं, लेकिन वे आधा सच बताते हैं। उन्होंने कहा कि ईडी को ताकत इसलिए दी गई ताकि मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, बेनामी संपत्ति, बैंक घोटाले और टेरर फंडिंग जैसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध देश और समाज के लिए कैंसर की तरह हैं और ऐसे अपराधों का इलाज “मीठी गोली” से नहीं हो सकता। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक ईडी ने करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। इनमें से लगभग 63 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति असली हकदारों तक वापस पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि इसमें बैंक, निवेशक और घर खरीदने वाले लोग शामिल हैं। पंकज चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि लोगों को न्याय दिलाने का काम है।

उन्होंने रोज वैली चिटफंड मामले का जिक्र करते हुए कहा कि निवेशकों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया में उन्होंने खुद भी भूमिका निभाई थी। पंकज चौधरी ने कहा कि जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी सिर्फ जांच करना नहीं, बल्कि समय पर अदालतों में अभियोजन शिकायतें दाखिल करना भी है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने दोगुनी अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं।

उन्होंने ईडी के कानूनी अधिकारियों और सरकारी वकीलों से कहा कि वे अदालतों को निष्पक्ष न्याय देने में पूरा सहयोग करें। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश का पैसा लेकर विदेश भागने वालों की संपत्तियां जब्त की जाएं और उनका समय पर प्रत्यर्पण हो। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में ईडी ने इस दिशा में काफी काम किया है और अच्छे नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट पर चिंता

पंकज चौधरी ने कहा कि देश में डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड भी तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहले यह समस्या बड़े शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब गांव और कस्बों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने “डिजिटल अरेस्ट” को देश में उभरता हुआ बड़ा अपराध बताया और कहा कि इसका सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग और कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोग हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ईडी ने साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की है और कई मामलों में पीड़ितों का पैसा भी वापस कराया गया है। वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली धोखाधड़ी भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि पैसा एक क्लिक में किसी भी देश या राज्य में ट्रांसफर हो जाता है। उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए सभी केंद्रीय एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।

पंकज चौधरी ने कहा कि FATF समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की वित्तीय जांच क्षमताओं की तारीफ हुई है और इसमें ईडी की बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में ईडी ने एशिया-प्रशांत एसेट रिकवरी नेटवर्क की अध्यक्षता संभाली। वहीं मार्च 2026 में ईडी और CBI ने नई दिल्ली में वैश्विक भ्रष्टाचार विरोधी नेटवर्क की बैठक की मेजबानी भी की।

NPA और बैंक घोटालों पर भी बोले

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने बैंकों की हालत सुधारने और एनपीए कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। IBC कानून के जरिए बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश हुई है और इसमें ईडी की जांचों ने भी अहम भूमिका निभाई है। पंकज चौधरी ने कहा कि सभी केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि पहले एजेंसियां “Need to Know” आधार पर काम करती थीं, लेकिन अब “Duty to Share” का समय है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी जिक्र

अपने भाषण में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अब न्याय व्यवस्था में सिर्फ आरोपी के अधिकार ही नहीं, बल्कि अपराध के पीड़ितों को न्याय दिलाने को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। भाषण के अंत में पंकज चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा या ताकतवर क्यों न हो, अगर उसने देश का पैसा लूटा है तो कानून सबके लिए बराबर है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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