Delhi News: दिल्ली में महिलाओं को मिलने वाली मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राजधानी में आगामी 1 अगस्त 2026 से दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जिनके पास वैध 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड होगा। परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना इस कार्ड के अब पिंक टिकट जारी नहीं किया जाएगा और यात्रियों को सामान्य टिकट का किराया चुकाना होगा।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार की पिंक टिकट व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर पूरी तरह स्मार्ट कार्ड आधारित प्रणाली लागू कर रही है। इसका उद्देश्य योजना को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और प्रभावी बनाना है।
कार्ड टैप करने के बाद ही मिलेगा पिंक टिकट
डीटीसी के आदेश के अनुसार, 1 अगस्त से महिला यात्रियों को बस में चढ़ते समय अपने 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर टैप करना होगा। वैरिफिकेशन के बाद ही उन्हें मुफ्त यात्रा का लाभ मिलेगा। जिन महिलाओं के पास यह कार्ड नहीं होगा, उन्हें पिंक टिकट जारी नहीं किया जाएगा और उन्हें निर्धारित सामान्य किराया देकर अपनी यात्रा पूरी करनी होगी।
डीटीसी की स्पेशल पहल
DTC ने बताया कि अपेक्षित संख्या में महिलाओं द्वारा स्मार्ट कार्ड नहीं बनवाए जाने के कारण डीटीसी ने विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। बसों में महिला यात्रियों को जल्द से जल्द 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड बनवाने की सलाह दी जा रही है। ताकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दिल्ली में 50 अधिकृत केंद्रों से जारी हो रहा पिंक सहेली कार्ड
सरकार ने 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड जारी करने के लिए पूरी दिल्ली में 50 अधिकृत केंद्र स्थापित किए हैं। पात्र महिलाएं परिवहन विभाग और डीटीसी की ओर से अधिसूचित केंद्रों व काउंटरों पर जाकर जरूरी दस्तावेजों के साथ कार्ड बनवा सकती हैं।
11 लाख कार्ड जारी, महीने के अंत तक 13 लाख का लक्ष्य
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 11 लाख 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड जारी हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य जुलाई के अंत तक यह संख्या बढ़ाकर 13 लाख तक पहुंचाने का है। 1 अगस्त से मुफ्त बस यात्रा योजना पूरी तरह स्मार्ट कार्ड आधारित व्यवस्था पर संचालित होगी।
नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही दिल्ली सरकार की कोशिश है कि मुफ्त बस यात्रा योजना का लाभ सिर्फ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। साथ ही टिकट वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाकर संचालन को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा सके।
