Matthew VanDyke Tihar Jail: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाने वाली एक बड़ी आतंकी साजिश और म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही गुटों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देने के आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक (Matthew Aaron VanDyke) ने दिल्ली की तिहाड़ जेल के खाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद 45 वर्षीय वैनडाइक ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर कर 'अमेरिकन-स्टाइल डाइट' ) दिए जाने की अनुमति मांगी है।
आरोपी के वकीलों ने अदालत को बताया कि तिहाड़ जेल में परोसा जाने वाला 'तीखा, मसालेदार, तैलीय और डीप-फाइड' भारतीय खाना खाने में वैनडाइक पूरी तरह असमर्थ है। इस वजह से वह पिछले करीब 50 दिनों से जेल के भीतर भूख हड़ताल पर है और केवल तरल पदार्थों के सहारे जीवित है।
NIA ने जवाब देने से किया इनकार
नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा (जो एनआईए मामलों की सुनवाई करते हैं) के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें सुनवाई के दौरान एनआईए (NIA) ने स्पष्ट किया कि वह इस आहार संबंधी आवेदन पर कोई आधिकारिक जवाब दाखिल नहीं करेगी। दूसरी ओर, तिहाड़ जेल प्रशासन ने इस मांग पर अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से कुछ समय मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तय की है।
याचिका में क्या है मांग?
वैनडाइक के वकीलों (रोहित दंडरियाल और रोहित गौर) द्वारा दायर अर्जी में जेल के भीतर लगातार 'सोया मिल्क' (Soy milk) की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसके अलावा, उसने अपने नियमित आहार के अनुसार पास्ता, चिकन, मछली और ऑलिव ऑयल जैसी चीजें मुहैया कराने की अनुमति मांगी है। वैनडाइक ने यह भी अनुरोध किया है कि उसे बुनियादी खाना पकाने के उपकरणों के साथ जेल के अंदर अपना भोजन खुद तैयार करने की अनुमति दी जाए, जिसका खर्च उसका परिवार उठाने को तैयार है।
व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचा आरोपी, भूख हड़ताल से बिगड़ी सेहत
याचिका में दावा किया गया है कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल और पोषण की कमी के कारण वैनडाइक की शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। वकीलों के मुताबिक, पोषक तत्वों की भारी कमी के कारण वैनडाइक की आंखों की रोशनी (Eyesight) प्रभावित होने लगी है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बेहद कम हो गई है।
इससे पहले 3 जुलाई को जब कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को 1 अगस्त तक बढ़ाया था, तब वैनडाइक को व्हीलचेयर पर अदालत के सामने पेश किया गया था। वह बेहद कमजोर और गंभीर रूप से अशक्त दिख रहा था और कोर्ट को संबोधित करने में भी असमर्थ था। वकीलों ने इस अर्जी को पूरी तरह से 'मानवीय आधार' पर स्वीकार करने की अपील की है।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?
मैथ्यू एरन वैनडाइक को एनआईए ने 13 मार्च 2024 को दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। उसी दिन दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ हवाई अड्डों से छह यूक्रेनी नागरिकों को भी पकड़ा गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
म्यांमार में ड्रोन ट्रेनिंग का आरोप: एनआईए का आरोप है कि ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, बिना वैध परमिट के मिजोरम गए और वहां से सीमा पार कर म्यांमार में प्रवेश कर गए। आरोप है कि वहां उन्होंने म्यांमार के जातीय सशस्त्र विद्रोही समूहों को ड्रोन युद्ध प्रणाली, ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक की सैन्य ट्रेनिंग दी।
एनआईए ने अदालत को बताया कि यह मामला भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली एक गहरी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक साजिश से जुड़ा है। जांच का दायरा बहुत व्यापक है, और डिजिटल उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण तथा फंडिंग स्रोतों को ट्रैक करने के लिए एजेंसी को यूएपीए के तहत जांच की अवधि 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करानी पड़ी है। सभी सातों आरोपियों ने सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) को अपने आवाज के नमूने देने पर सहमति दे दी है।
कौन है मैथ्यू एरन वैनडाइक? (डॉक्यूमेंट्री मेकर से 'मिलिशिया ट्रेनर' तक)
भारत में गिरफ्तारी से पहले, मैथ्यू वैनडाइक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अमेरिकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता, वॉर-जोन वालंटियर और 'संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) नामक एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन के संस्थापक के रूप में जाना जाता था।
लीबिया और इराक का इतिहास
वैनडाइक ने 2011 में लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह के दौरान विद्रोहियों का साथ दिया था, जहां उसे बंदी बना लिया गया था। कई महीनों बाद भागने में सफल रहने के बाद उसने अपने अनुभवों पर 'पॉइंट एंड शूट' नामक पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। इसके बाद वह एसओएलआई (SOLI) के जरिए इराक, यूक्रेन और अब म्यांमार जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्वयंसेवी बलों को सैन्य प्रशिक्षण देने में शामिल हो गया।
निजी सेना या एनजीओ?: शोधकर्ताओं का मानना है कि वैनडाइक का संगठन एक पारंपरिक एनजीओ और एक 'प्राइवेट मिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन' (निजी सेना/मर्सिनरी) के बीच की धुंधली रेखा पर काम करता है, हालांकि उसका संगठन खुद को भाड़े का सैनिक मानने से इनकार करता है। खुद को एक कट्टर ईसाई बताने वाले वैनडाइक का कहना है कि उसका यह काम कमजोर और पीड़ित समुदायों की रक्षा करने के उसके नैतिक कर्तव्य का हिस्सा है। फिलहाल भारत में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना बाकी है।
