Yamunotsav 2025: दिल्ली के वासुदेव घाट पर भक्तों ने दीप जलाकर दो दिवसीय “यमुनोत्सव 2025” का शुभारंभ किया। इस आयोजन का पहला दिन यमुना नदी के आध्यात्मिक महत्व को समर्पित है, जिसकी शुरुआत यमुनोत्री से लाए गए पवित्र जल से ‘जलाभिषेक’ के साथ हुई। इसके बाद शाम को यमुना कथा और आरती का आयोजन किया गया।
दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव की जानकारी देते हुए संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को बताया था कि यह कार्यक्रम 2 और 3 नवंबर को वासुदेव घाट पर आयोजित किया जाएगा। कपिल मिश्रा ने कहा कि यह उत्सव दिल्ली और यमुना के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध को मजबूत करेगा। यमुना की निरंतरता और स्वच्छता, दिल्ली की पहचान का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि, हमारा लक्ष्य है कि यह नदी शुद्ध और जीवंत बनी रहे। हाल ही में छठ पूजा के दौरान, पांच साल बाद भक्तों ने यमुना किनारे पूजा-अर्चना की। ‘यमुनोत्सव’ इसी जुड़ाव को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।
यमुनोत्री से लाए गए जल से जलाभिषेक
यह उत्सव संस्कृति विभाग और यमुना संसद के देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन का फोकस नदी के आध्यात्मिक स्वरूप पर रहेगा, जिसमें यमुना के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यमुनोत्री से लाए गए जल से ‘जलाभिषेक’ किया जाएगा। इसके बाद यमुना कथा और सांध्य आरती का आयोजन होगा। इस आयोजन को “भव्य और दिव्य” बताते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि यमुना न केवल पारिस्थितिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी दिल्ली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नदी की पवित्रता बनाए रखना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
दूसरे दिन यमुना कॉन्क्लेव का आयोजन
यमुना संसद के संयोजक रवि शंकर तिवारी ने बताया कि उत्सव के दूसरे दिन “यमुना कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जाएगा, जो वैज्ञानिक विमर्श पर केंद्रित होगा। इसमें केंद्र और दिल्ली सरकार के मंत्री, सांसद और जल संरक्षण विशेषज्ञ पांच विषयगत सत्रों में यमुना के पुनर्जीवन के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करेंगे। रवि शंकर तिवारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि दिल्ली का हर नागरिक इस सामूहिक प्रयास का हिस्सा बने, यमुना का उत्सव मनाए और इसके संरक्षण की शपथ ले।
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