फलां व्यक्ति ने तो तुगलकी फरमान सुना दिया। अजीबो-गरीब निर्णय लेने और उनको पालन कराने पर 'तुगलकी फरमान' मुहावरे का भरपूर इस्तेमाल होता है। कुछ भी अटपटा हो तो हर किसी की जुबां से तुरंत तुगलकी फरमान मुहावरा निकल आता है। आखिर यह तुगलकी फरमान है क्या? क्या इसका नाता एक समय दिल्ली पर राज करने वाले तुगलक वंश से है? अगर हां, तो फिर उन्होंने ऐसे क्या फैसले लिए या फरमान दिए, जिसके कारण तुगलकी फरमान एक मुहावरा बना गया। चलिए जानते हैं -
कहां इस्तेमाल होता है तुगलकी फरमान मुहावरा
जब भी किसी के किसी फैसले की आलोचना करनी हो या वह अटपटा लगे, उससे मानने का मन न हो तो तुरंत मुंह से 'तुगलकी फरमान' मुहावरा निकल पड़ता है। जब भी सरकार का, किसी नेता का, अधिकारी का या किसी भी उच्च पदस्थ का कोई फैसला देश या समाज के भले के लिए न होकर पूरी तरह से गलत महसूस हो तो उस फैसले की आलोचना के लिए हम और आप 'तुगलकी फरमान' मुहावरे का इस्तेमाल करते हैं।
क्या दिल्ली से है संबंध
जी हां, 'तुगलकी फरमान' मुहावरे का संबंध दिल्ली पर लंबे समय तक राज करने वाले तुगलक वंश से संबंध है। इसका संबंध दिल्ली सल्तनत के मोहम्मद बिन तुगलक से है। मोहम्मद बिन तुगलक ने अपने कार्यकाल में कुछ ऐसे अजीब-ओ-गरीब फैसले लिए थे, जिसके कारण आज भी किसी की कोई बात हमें पसंद नहीं आती तो हमारे मुंह से सहसा 'तुगलकी फरमान' मुहावरा निकल जाता है।
कौन था मोहम्मद बिन तुगलक
दिल्ली सल्तनत पर साल 1320 से 1413 ईस्वी तक तुगलक वंश का राज रहा। तुगलक वंश के दूसरे शासक का नाम मोहम्मद बिन तुगलक था, जो इस वंश की नींव रखने वाले गयासुद्दीन तुगलक का बड़ा बेटा था। वह साल 1325 में दिल्ली सल्तनत के तख्त पर बैठा था। मोहम्मद बिन तुगलक अगले 26 वर्षों तक सत्ता में रहा। ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि तुगलक शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का भौगोलिक क्षेत्रफल सबसे ज्यादा था। साफ शब्दों में कहें तो उस समय दिल्ली सल्तनत का राज पूरे देश पर चलता था। मोहम्मद बिन तुगलक का शासनकाल विवादों में घिरा रहा।
मोहम्मद बिन तुगलक ने कौन से विवादित फैसले किए
मोहम्मद बिन तुगलक ने साल 1325 में सत्ता संभाली और 1327 में वह अपनी राजधानी दिल्ली से तत्कालीन देवगिरी ले गया। उसने देवागिरी का नाम बदलकर दौलताबाद रखा, जो आज के महाराष्ट्र राज्य में मौजूद है। मोहम्मद बिन तुगलक का मानना था कि दौलताबाद से वह उत्तर और दक्षिण में पूरे भारत पर अच्छी तरह से राज कर पाएगा। कई हलचल के बीच आखिरकार 1335 में वह एक बार फिर अपनी राजधानी को दिल्ली ले आया। राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद और फिर दौलताबाद से दिल्ली लाने पर उसने अपनी प्रजा को भी जबरदस्ती शिफ्ट करवाया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए। मोहम्मद बिन तुगलक ने यह फैसले रातोंरात किए और सभी नागरिकों के लिए उसके फैसले को मानना अनिवार्य था।
एक और तुगलकी फरमान
मोहम्मद बिन तुगलक का एक और फरमान काफी चर्चित और विवादास्पद रहा है। मोहम्मद बिन तुगलक ने सबसो चौंकाते हुए उस समय चलन में रहे चांदी के सिक्कों को रातोंरात बंद करके तांबे के सिक्के चलवाने शुरू कर दिए। उसने तांबे के जो सिक्के ढलवाए थे, वह अच्छी क्वालिटी के नहीं थे। इसके अलावा लोगों ने उनकी नकल करके तांबे के सिक्कों को घर में ढालना शुरू कर दिया था। इसके बाद आम लोग अपने ढाले गए सिक्कों से ही जजिया यानी टैक्स अदा करने लगे। इस तरह से मोहम्मद बिन तुगलक का यह फैसला भी गलत ही साबित हुआ और उससे उसकी सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हुआ। इस नुकसान की भरपायी के लिए उसने टैक्स भी बढ़ा दिया था।
इस तरह से उलूल-जुलूल फैसलों के कारण मोहम्मद बिन तुगलक की काफी आलोचना ही और उसके फैसलों को लेकर 'तुगलकी फरमान' मुहावरा बन गया।
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