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Delhi News: दिल्ली में आंधी से उखड़े 100 से अधिक पेड़, विशेषज्ञों ने नगर निकाय को ठहराया जिम्मेदार

दिल्ली में शुक्रवार की सुबह बारिश-आंधी के साथ हुई। इसी के साथ पेड़ों और टहनियों के गिरने और इससे हुए नुकसान की भी खबरें आने लगीं। मिली शिकायतों के आंकड़ें देखने पर पता चलता है कि दिल्ली में 100 से ऊपर पेड़ उखड़ गए हैं। इसके लिए पर्यावरणविद विकास के गलत तरीकों को जिम्मेदार मानते हैं।

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आंधी-बारिश में उखड़े 100 से ऊपर पेड़

Photo : PTI

Tree Uprooted In Delhi: शुक्रवार की सुबह अचानक बदले मौसम से दिल्ली में मौसम तो ठंडा हो गया लेकिन आंधी और बारिश से शहर के कई पेड़ उखड़ गए। इसको लेकर पर्यावरणविदों ने अनियंत्रित शहरी विकास को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ों के आसपास सीमेंट लगाकर चबूतरा आदि बना देना पेड़ों को कमजोर करता है।

राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार तड़के आई आंधी में 100 से 200 पेड़ उखड़ गए, जिसके लिए पर्यावरणविदों ने शहर के विकास के गलत तरीके को जिम्मेदार बताया है। शहर में भारी बारिश के कारण दिल्ली नगर निगम को पेड़ गिरने की 53 शिकायतें मिलीं, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को ऐसी 24 शिकायतें मिलीं, जबकि लोक निर्माण विभाग को पेड़ों के उखड़ने या टहनियों के गिरने की कम से कम 200 शिकायतें प्राप्त हुईं। दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से लगभग दिनभर पेड़ों के गिरने की शिकायतें आती रहीं।

सीमेंट के निर्माणों से जड़ें होती हैं कमजोर

ऐसे में विशेषज्ञों ने पेड़ों के कमजोर होने के लिए उनके आधार पर अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण को जिम्मेदार ठहराया।

दिल्ली के पर्यावरणविद् वरहीन खन्ना ने कहा कि, "पेड़ के आधार के चारों ओर लगा सीमेंट पेड़ को गिरने का कारण बनता है। यह पानी और हवा को जड़ों तक पहुंचने से रोकता है और तने को फैलने से रोकता है।"

उन्होंने ये भी कहा, "मानसून के दौरान, नमी बढ़ने के कारण पेड़ों के तने को फैलने की जरूरत होती है, लेकिन सीमेंट के कारण ऐसा नहीं हो पाता। जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पेड़ अपना संतुलन खो देता है। अगर आस-पास खुदाई करने से जड़ें कट जाती हैं, तो गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

पेड़ों को पनपने का देना चाहिए मौका

खन्ना ने गिरे हुए पेड़ों को स्वयं पनपने देने के बजाय उन्हें काटने और हटाने में जल्दबाजी करने के लिए नगर निकायों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, "अधिकारियों के पास इन पेड़ों को बचाने के लिए संसाधन तो हैं, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है। मित्रवत ढंग से थोड़ा समझाने और उदाहरण कायम करने से अधिकारियों को मनाया जा सकता है और जब वे काम करते हैं तो सफलता दर अधिक होती है।"

कंक्रीट निर्माण हटाने को मिले थे निर्देश

हरित कार्यकर्ता भवरीन कंधारी ने पर्यावरण विनाश के लिए वर्षों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि, "प्राथमिक कारणों में से एक है पेड़ों के आधार के आसपास अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण, जो महत्वपूर्ण पोषक जड़ों के विकास को रोकता है और आधार को कमजोर करता है। निर्माण से संबंधित मिट्टी का संघनन, बार-बार खुदाई, और पुरानी जड़ प्रणाली समस्या को और भी बदतर बना देती है।"

कंधारी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के 2013 के आदेश में सभी प्राधिकारियों को पेड़ों के चारों ओर एक मीटर के दायरे से कंक्रीट हटाने का निर्देश दिया गया था लेकिन इस निर्देश का अभी भी ठीक से पालन नहीं हो रहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जब तक सरकार पेड़ों के स्वास्थ्य को अपनी शहरी योजना में शामिल नहीं करती और मौजूदा नियमों को लागू नहीं करती, तब तक ये घटनाएं बढ़ती ही रहेंगी।"

(इनपुट-भाषा)

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Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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