दिल्ली

एक घंटे चली सर्जरी, डॉक्टरों ने पेट से निकाले हजारों स्टोन्स; गिनने में 6 घंटे लग गए

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल के चिकित्सकों ने 70 वर्षीय एक मरीज के पित्ताशय से 8125 पथरी निकाल कर हैरान कर दिया। डॉ. अमित जावेद और उनकी टीम ने एक घंटे की सर्जरी के दौरान पथरी को सफलतापूर्वक निकाला। हजारों की संख्या में निकली पथरी गिनने में 6 घंटे का समय लग गया।

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(सांकेतिक फोटो)

गुरुग्राम : शहर स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ सर्जरी कर एक 70 वर्षीय मरीज के पित्ताशय से 8,125 पथरी निकाली। मरीज कई वर्षों से पेट के दर्द, बीच-बीच में बुखार आने, भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत से परेशान था। उन्हें सीने में भी भारीपन महसूस हो रहा था। दैनिक जागरण के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, डॉ. अमित जावेद और डॉ. नरोला येंगर की नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने एक घंटे की सर्जरी के दौरान पित्ताशय से पथरी निकाली।

डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की स्थिति काफी गंभीर थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने के बाद तत्काल अल्ट्रासाउंड किया गया, जिसमें पित्ताशय में भारीपन पाया गया। सर्जरी के बाद, डॉक्टरों को पित्ताशय से निकाले गए गॉलस्टोन्स की गिनती करनी पड़ी, जिसमें 8,125 की संख्या सामने आई। डॉ. जावेद ने बताया कि यह मामला दुर्लभ था, और मरीज की उपेक्षा के कारण पथरी इतनी बढ़ गई थी। इस मामले में मरीज द्वारा पिछले कई वर्षों तक उपेक्षा का ही नतीजा था कि पथरी इस हद तक बढ़ गई थी। यदि अब और देरी की जाती, तो मरीज की हालत काफी बिगड़ सकती थी

गॉलब्लैडर में पस बन सकता था

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उन्हें कोई खास बेचैनी नहीं है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि पित्ताशय की पथरी का उपचार न करने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में भी इलाज न कराया जाए तो गॉलब्लैडर में पस (मवाद) बनने लगता है और गॉलब्लैडर की भीतरी सतह भी सख्त होने लगती है और इसमें फाइब्रॉसिस भी हो सकता है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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