दिल्ली

Cyber Fraud: देश की राजधानी में सबसे बड़ी साइबर ठगी, महिला डॉक्टर के खाते से उड़ाए 4.5 करोड़

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 20, 2023, 11:04 AM IST

Delhi Biggest Cyber Fraud: 34 वर्षीय महिला डॉक्टर से साइबर ठगी FedEx पैकेज के माध्यम से की गई। कॉल पर अपराधियों ने खुद को महाराष्ट्र नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताया और महिला पर आरोप लगाया कि वह ड्रग के कारोबार से जुड़ी हुई है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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दिल्ली में महिला डॉक्टर के खाते से 4.5 करोड़ की ठगी

Photo : BCCL

Delhi Biggest Cyber Fraud: देश की राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ी साइबर ठगी सामने आई है। यहां साइबर अपराधियों ने एक महिला डॉक्टर के खाते से 4.47 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। अपराधियों ने खुद को नारकोटिक्स डिपार्टमेंट का अधिकारी बताकर इस पूरे मामले को अंजाम दिया। दूसरी तरफ पीड़ित डॉक्टर ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने बताया, 34 वर्षीय महिला डॉक्टर से साइबर ठगी FedEx पैकेज के माध्यम से की गई। महिला डॉक्टर को एक कॉल पर बताया गया कि उनके पैकेज को सीज कर दिया गया है, क्योंकि उसमें एमडीएमए ड्रग मिला है। कॉल पर अपराधियों ने खुद को महाराष्ट्र नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताया और महिला पर आरोप लगाया कि वह ड्रग के कारोबार से जुड़ी हुई है।

अनजान नंबर से आया था फोन

महिला डॉक्टर ने बताया कि पांच मई को उसके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉलर ने खुद को FedEx का कर्मचारी बताया। मुझसे बताया गया कि मेरा पैकेज सीज हो गया है। महिला डॉक्टर ने आगे बताया कि कॉलर ने बताया कि पैकेज में उसके कुछ सामान के साथ एमडीएम ड्रग मिला है, जिस वह से पैकेज को सीज कर दिया गया है। जब महिला अधिकारी ने उसे किसी पार्सल की जानकारी होने से इंकार किया तो उससे अंधेरी पुलिस स्टेशन पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया।

और शुरू हो गया खेल

यह पूरा खेल स्काइप ऐप के माध्यम से हुआ। महिला डॉक्टर ने बताया कि कॉलर ने उसकी कॉल किसी इंस्पेकटर स्मिता पाटिल को ट्रांसफर कर दी। इसके बाद मुझे सलाह दी गई कि मैं ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हूं, इसके लिए मुझे स्काइप ऐप डाउनलोड करना होगा। जब महिला डॉक्टर ने स्काइप डाउनलोड कर लिया, उसके बाद इंस्पेक्टर पाटिल होने का दावा करने वाली महिला उनसे स्काइप के जरिए जुड़ी। इसके बाद मुझसे इसी आईडी पर अपना बयान दर्ज कराने का कहा गया।

मांगी खाते की जानकारी

महिला डॉक्टर ने बताया कि स्काइप पर इंस्पेक्टर पाटिल होने का दाव करने वाली महिला ने बताया कि उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का शक है। ऐसे में उसे अपने सभी खातों में बैलेंस की जानकारी देनी होगी। इसके बाद जैसे वह महिला कहती गई, पीड़ित डॉक्टर ने वैसा ही किया। इसके बाद उसे कॉल पर एक के बाद एक कथित पुलिस अधिकारियों से भी बात कराई गई। कॉल पर महिला अधिकारी को सलाह दी गई कि वह इस मामले में किसी अन्य को शामिल न करें, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें भी मनी लॉन्ड्रिंग में अपराधी माना जाएगा।

आरबीआई के नाम पर भी हुई ठगी

महिला डॉक्टर ने बताया कि कॉल के दौरान एक व्यक्ति ने उससे खुद को आरबीआई का अधिकारी बनकर बात की। डॉक्टर से कहा गया कि उसके खाते में जमा रकम अवैध तरीके से कमाई गई है। ऐसे में इस रकम को आरबीआई के खाते में ट्रांसफर करनी होगी। वैरिफिकेशन के बाद इस रकम को वापस कर दिया जाएगा। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा करके महिला अधिकारी के खाते से 4.47 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए। इतना ही नहीं साइबर अपराधिकयों ने महिला को आरबीआई के नाम पर एक चिट्ठी तक भेज दी। साथ ही स्काइप पर हुई बातचीत को डिलीट करने को भी कहा गया।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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