दिल्ली-एनसीआर में हर साल दीपावली के बाद प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है, मगर इस दफा इससे भी बढ़कर हो गया है बताते हैं कि यहां की वायु गुणवत्ता (Delhi Air Quality) काफी बिगड़ती हुई देखी जा रही है संडे की सुबह यहां वायु की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 260 से ज्यादा दर्ज किया गया।
इससे पहले शनिवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 248 दर्ज किया गया, जोकि खराब श्रेणी है, वहीं, नोएडा में 249, गाजियाबाद में 217 दिखा।
हालात कई प्रकार की बीमारियों के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं
वहीं डॉक्टर चेता रहे हैं कि ऐसे हालात कई प्रकार की बीमारियों के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं यही वजह है कि हर साल सरकार लोगों से पटाखों के जगह पर दीया जलाकर दिवाली मनाने की अपील करती है और लोगों से प्रदूषण बढ़ने की वजह से पटाखे जलाने को मना किया जाता है।
पराली जलाने से सबसे ज्यादा प्रदूषण के मामले सामने आते हैं
ध्यान रहे कि दिल्ली में सर्दियां शुरु होते ही दिल्ली के आसपास हरियाणा और पंजाब के इलाके में पराली जलाने से सबसे ज्यादा प्रदूषण के मामले सामने आते हैं और पराली जलाने से दिल्ली में हवा का स्तर खराब हो जाता है। अक्टूबर-नवंबर माह में धान की कटाई का सीजन शुरू हो जाता है। किसान प्रतिबंधों की अनदेखी कर पराली को आग के हवाले करने से बाज नहीं आते। इसका खामियाजा वायु प्रदूषण के तौर पर झेलना पड़ता है। दिल्ली-एनसीआर में तेजी से गिरती हवा की क्वालिटी के पीछे पराली जलाने की घटनाएं सबसे बड़ी वजह के तौर पर सामने आ रही हैं।
प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 35 फीसदी पहुंची
प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 35 फीसदी तक पहुंच गई है, जो अब तक इस वर्ष सबसे अधिक माना जा रहा है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि और अनुकूल परिवहन-स्तरीय हवा की गति के कारण भी ऐसा होना बताया जा रहा है। हालांकि, राजधानी क्षेत्र में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' के स्टेज 2 को लागू कर दिया गया है फिर भी प्रदूषण में कमी के बजाय वृद्धि दर्ज की जा रही है। आइये जानते हैं दिल्ली को पॉल्यूशन से ढकने में किस राज्य का हाथ ज्यादा है।
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