Delhi News: सरकार के आदेश के बाद दिल्ली में दवाओं की बिक्री पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को लेकर केमिस्टों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। एक ओर जहां सरकार इस कदम को पारदर्शिता और अवैध दवा व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम पहल बता रही है, वहीं केमिस्ट एसोसिएशनों के बीच इसे लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही स्वर सामने आ रहे हैं।
दो एसोसिएशनों के बीच टकराव
दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट एलायंस (DRDCA) ने सीसीटीवी निगरानी संबंधी आदेश को गैर-कानूनी बताते हुए स्पष्ट किया है कि दिल्ली सरकार और ड्रग्स कंट्रोल विभाग के पास इसे अनिवार्य बनाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। DRDCA के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा, "यह महज एक सलाह है, जिसे मानना दुकानदार की मर्जी पर निर्भर करता है। इस पर जबरदस्ती नहीं की जा सकती।"
वहीं दूसरी ओर, साउथ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (SCDA) ने सरकार के इस निर्णय का समर्थन किया है। एसोसिएशन के संरक्षक रामपत का कहना है कि यह कदम दवा व्यापार में पारदर्शिता लाने, नकली दवाओं की बिक्री रोकने और आम उपभोक्ताओं में दवा विक्रेताओं के प्रति विश्वास बढ़ाने में मददगार होगा।
दवा दुकानों पर बढ़ रही निगरानी
दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग का कहना है कि शहर में लगभग 20,000 फुटकर दवा विक्रेताओं पर इन मतभेदों का कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। विभाग के मुताबिक, कई दुकानदार स्वेच्छा से अपने स्टोरों में सीसीटीवी कैमरे लगा रहे हैं। शीघ्र ही सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में आदेशों के पालन के लिए निर्देश दिए जाएंगे।
सरकार की सख्ती: नशीली दवाओं की बिक्री पर लगाम
गौरतलब है कि 24 जुलाई को दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने एक सख्त आदेश जारी किया था, जिसमें दवाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने और विशेष रूप से शेड्यूल H, H-1 और X जैसी संवेदनशील दवाओं की बिक्री को लेकर कड़े दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था।
यह आदेश नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और दिल्ली चाइल्ड राइट्स प्रोटेक्शन कमीशन (DCPCR) के साथ मिलकर तैयार की गई संयुक्त कार्रवाई योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बच्चों, किशोरों और समाज के कमजोर वर्गों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचाना है।
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