BBC Documentary on Narendra Modi: गुजरात दंगों (2002 में) पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) पर बैन के केंद्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वालों पर केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रीजीजू ने जुबानी निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि ऐसा कर के वे लोग टॉप कोर्ट के कीमती समय को ‘‘बर्बाद’’ करते हैं। सोमवार (30 जनवरी, 2023) को रीजीजू ने सीनियर पत्रकार एन राम, वकील प्रशांत भूषण और अन्य की ओर से वृत्तचित्र ‘‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चशन’’ पर पाबंदी लगाने के केंद्र के फैसले को टॉप कोर्ट में चुनौती देने पर ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस तरह वे माननीय उच्चतम न्यायालय का कीमती वक्त बर्बाद करते हैं, जहां हजारों आम नागरिक न्याय का इंतजार कर रहे हैं और तारीखें मांग रहे हैं।’’
रिजिजू ने रात में याचिकाकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए फिर से ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने ट्वीट किया, "झूठा प्रचार कब तक चल सकता है? इस मामले को भारत की सर्वोच्च अदालत ने सुलझा लिया है और इसे दरकिनार कर दिया है।" उन्होंने आगे लिखा, "इस तरह के लोगों का मकसद क्या है? उनका उद्देश्य क्या है? क्या भारत का सर्वोच्च न्यायालय सर्वोच्च है या बीबीसी? भारत इस औपनिवेशिक मानसिकता से बहुत आगे निकल चुका है।"
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने वकील एम एल शर्मा और एन राम व भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सी यू सिंह की दलीलों पर गौर किया। दोनों वकीलों ने इस मुद्दे पर अपनी अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। दरअसल, केंद्र सरकार ने 21 जनवरी को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरेपोरेशन (बीबीसी) के विवादास्पद वृत्तचित्र ‘‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’’ के लिंक साझा करने वाले कई यूट्यूब वीडियो और ट्विटर पोस्ट को ब्लॉक करने के निर्देश जारी किए थे।
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