Namo City Plan: दिल्ली-एनसीआर (NCR) में बढ़ती आबादी और प्रदूषण के दबाव को देखते हुए सरकार ने भविष्य को लेकर महायोजना बनाई है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक में हुए फैसले के तहत अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 4 अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड सिटी विकसित की जाएंगी। जिन्हें फिलहाल 'नमो सिटी' (Namo Cities) कहा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनसीआर के दायरे में आने वाले चारों राज्यों यानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को एक-एक नमो सिटी की सौगात मिलेगी। इन शहरों का चुनाव करने के लिए राज्यों के बीच एक 'चैलेंज' का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए अगले 5 सालों में 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान रखा है।
दिल्ली में कहां बनेगी 'नमो सिटी'?
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण मुक्त और स्मार्ट 'नमो सिटी' बनाने के लिए तीन संभावित जगहों की पहचान की है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल टीएस संधू की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जहां तकनीकी और भौगोलिक जांच के बाद किसी एक फाइनल जगह पर मुहर लगेगी।
ये 3 लोकेशन शॉर्टलिस्ट
नरेला-बवाना: यहा सबसे अधिक खाली जमीन मौजूद है और यह इलाका सीधे NH-44 से भी जुड़ा है। आने वाले समय में यह
मेट्रो और नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर से भी जुड़ जाएगा।
अलीपुर-बुराड़ी: लैंड पूलिंग नीति के कारण इस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण काफी आसान है। साथ ही यह जगह एक्सप्रेसवे के नजदीक भी है, जिससे इसकी यूपी और हरियाणा से अच्छी कनेक्टिविटी है।
द्वारका फेज-2: यह एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे के पास स्थित इलाका है। यहां 'यशोभूमि' (IICC) और डिप्लोमेटिक एन्क्लेव होने की वजह से 'वॉक-टू-वर्क' कल्चर के लिए यह जगह सबसे बेहतरीन है।
क्या होंगी 'नमो सिटी' की खासियत?
नमो सिटी एक मेगा स्मार्ट सिटी परियोजना है, जिसका मकसद भविष्य की जरूरतों के अनुसार पूरी तरह आधुनिक, प्रदूषण-मुक्त और तकनीक आधारित शहर बसाना है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक नमो सिटी के नाम से कोई आधिकारिक परियोजना का ऐलान नहीं किया गया। आइए जानते हैं कि इन स्मार्ट सिटीज की प्रमुख खासियत क्या होंगी:
- 'वॉक-टू-वर्क' कल्चर (पैदल चलकर काम पर जाना): इन शहरों की प्लानिंग इस तरह से की जाएगी कि लोगों के घर, दफ्तर और कमर्शियल सेंटर कम दूरी पर हों। जिससे पैदल चलकर भी यहां पहुंचा जा सके। इससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों से बड़ी राहत मिलेगी।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल और साइकिलें: पर्यावरण को बचाने और प्रदूषण को कम करने के लिए इन शहरों के मुख्य हिस्सों में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और साइकिलों को ही चलने की अनुमति होगी।
- 24 घंटे बिजली-पानी और स्मार्ट सुविधाएं: इन शहरों को 'ग्लोबल मिनीफाइड स्मार्ट सिटी' की तर्ज पर बनाया जाएगा, जहां अंडरग्राउंड यूटिलिटी लाइनें (बिजली-इंटरनेट के तार) और आधुनिक कचरा प्रबंधन की व्यवस्था होगी।
- दिल्ली पर घटेगा बोझ: इन नए शहरों में कॉर्पोरेट हब और औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण किया जाएगा। जिससे दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बिजनेस बाहर शिफ्ट हो सकेंगे। इससे लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
- हाई-स्पीड कनेक्टिविटी: सभी नमो सिटीज को रैपिड रेल (नमो भारत) या मेट्रो जैसे हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे दिल्ली आना-जाना मिनटों का खेल होगा।
- विशाल ग्रीन बेल्ट: इन शहरों के एक बहुत बड़े हिस्से पर 'हरित क्षेत्र' (Green Belt) विकसित किया जाएगा।
प्रदूषण रोकने के लिए अब इलाके के हिसाब से लगेंगे प्रतिबंध
बैठक में यह स्पष्ट कहा गया कि एनसीआर के मौजूदा दायरे में कोई बदलाव नहीं होगा। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों को बेवजह के प्रतिबंधों से बचाने के लिए अब प्रदूषण नियंत्रण के नियम तीन चरणों में लागू किए जाएंगे-कोर एरिया, सेंट्रल एरिया और पूरा एनसीआर। साथ ही, वाहनों के प्रदूषण को रोकने के लिए 'परिवर्तन' (PARIVARTAN) स्कीम लागू की जाएगी। इसके तहत शुरुआती चरण में BS-1, BS-2 और BS-3 वाहनों को पूरी तरह से स्क्रैप किया जाएगा। वहीं, BS-4 वाहनों को कोर एरिया से बाहर यानी केवल बाहरी एनसीआर क्षेत्रों में ही चलने की अनुमति दी जाएगी। शुरुआत में यह योजना गाड़ी चालकों के लिए स्वैच्छिक होगी, जिसे बाद में अनिवार्य किया जाएगा।
