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Economic Survey 2025-26: 5.31 लाख रुपये सालाना कमा रहा है हर दिल्लीवासी! मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सर्वे ने पेश की राजधानी की 'पॉवरफुल' तस्वीर

दिल्ली विधानसभा में सोमवार का दिन आंकड़ों की बाजीगरी से ज्यादा राजधानी की आर्थिक सेहत की एक सुनहरी तस्वीर पेश करने वाला रहा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जब सदन के पटल पर वर्ष 2025-26 की 'आर्थिक समीक्षा' (Economic Survey) रखी, तो साफ हो गया कि दिल्ली वाले न केवल देश में सबसे अमीर हैं, बल्कि उनकी कमाई राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ रही है। आइए देखते हैं क्या है आर्थिक सर्वे का हाईलाइट।

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दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-2026 विधानसभा में पेश

Delhi Economic Survey 2025-26: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई आर्थिक समीक्षा 2025-26 के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था अब तेज रफ्तार से उड़ान भर रही है। सर्वे के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 5,31,610 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 7.92% की बढ़ोतरी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि एक औसत दिल्लीवासी की कमाई देश के बाकी हिस्सों के औसत नागरिक की तुलना में लगभग ढाई गुना ज्यादा रहने का अनुमान है।

13 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था: सेवा क्षेत्र का दबदबा

दिल्ली की कुल जीडीपी (GSDP) अब 13.27 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को छूने के करीब है। राजधानी की इस संपन्नता के पीछे सबसे बड़ा हाथ 'सर्विस सेक्टर' (सेवा क्षेत्र) का है, जिसका दिल्ली की अर्थव्यवस्था में 86.32% का विशाल योगदान है। व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट और आईटी जैसी सेवाओं ने दिल्ली को देश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बनाए रखा है।

बजट का गणित: शिक्षा और स्वास्थ्य पर मेहरबानी

सरकार ने इस बार 1 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट पेश करने की तैयारी की है। सर्वे के मुताबिक, सरकार की तिजोरी में टैक्स के जरिए आने वाली राशि में 15.54% की वृद्धि होने का अनुमान है। इस बढ़ी हुई आय का बड़ा हिस्सा जनता की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है:

परिवहन: बजट का सबसे बड़ा हिस्सा (20%) परिवहन को मिला है। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या मार्च 2026 तक बढ़कर 4,338 हो गई है, जो प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा को 13% और स्वास्थ्य को 12% हिस्सा आवंटित किया गया है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 98% तक पहुंचना शिक्षा मॉडल की सफलता की कहानी कह रहा है।

सामाजिक सुरक्षा: लाखों चेहरों पर मुस्कान

आर्थिक तरक्की के बीच सरकार ने कमजोर वर्गों का भी पूरा ख्याल रखा है। सर्वे के अनुसार, दिल्ली में लगभग 4.40 लाख बुजुर्गों, 4.09 लाख महिलाओं और 1.40 लाख दिव्यांगों को हर महीने सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह आंकड़ा बताता है कि दिल्ली का विकास केवल सड़कों और बिल्डिंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है।

बिजली-पानी की बढ़ती मांग

जैसे-जैसे दिल्ली बढ़ रही है, उसकी जरूरतें भी बढ़ रही हैं। राजधानी में बिजली की अधिकतम मांग 8,442 मेगावाट तक पहुंच गई है। वहीं, जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए बजट में 15% का प्रावधान किया गया है, ताकि हर घर तक साफ पानी पहुंच सके।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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