Delhi Economic Survey 2025-26: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई आर्थिक समीक्षा 2025-26 के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था अब तेज रफ्तार से उड़ान भर रही है। सर्वे के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 5,31,610 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 7.92% की बढ़ोतरी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि एक औसत दिल्लीवासी की कमाई देश के बाकी हिस्सों के औसत नागरिक की तुलना में लगभग ढाई गुना ज्यादा रहने का अनुमान है।
13 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था: सेवा क्षेत्र का दबदबा
दिल्ली की कुल जीडीपी (GSDP) अब 13.27 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को छूने के करीब है। राजधानी की इस संपन्नता के पीछे सबसे बड़ा हाथ 'सर्विस सेक्टर' (सेवा क्षेत्र) का है, जिसका दिल्ली की अर्थव्यवस्था में 86.32% का विशाल योगदान है। व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट और आईटी जैसी सेवाओं ने दिल्ली को देश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बनाए रखा है।
बजट का गणित: शिक्षा और स्वास्थ्य पर मेहरबानी
सरकार ने इस बार 1 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट पेश करने की तैयारी की है। सर्वे के मुताबिक, सरकार की तिजोरी में टैक्स के जरिए आने वाली राशि में 15.54% की वृद्धि होने का अनुमान है। इस बढ़ी हुई आय का बड़ा हिस्सा जनता की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है:
परिवहन: बजट का सबसे बड़ा हिस्सा (20%) परिवहन को मिला है। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या मार्च 2026 तक बढ़कर 4,338 हो गई है, जो प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा को 13% और स्वास्थ्य को 12% हिस्सा आवंटित किया गया है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 98% तक पहुंचना शिक्षा मॉडल की सफलता की कहानी कह रहा है।
सामाजिक सुरक्षा: लाखों चेहरों पर मुस्कान
आर्थिक तरक्की के बीच सरकार ने कमजोर वर्गों का भी पूरा ख्याल रखा है। सर्वे के अनुसार, दिल्ली में लगभग 4.40 लाख बुजुर्गों, 4.09 लाख महिलाओं और 1.40 लाख दिव्यांगों को हर महीने सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह आंकड़ा बताता है कि दिल्ली का विकास केवल सड़कों और बिल्डिंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है।
बिजली-पानी की बढ़ती मांग
जैसे-जैसे दिल्ली बढ़ रही है, उसकी जरूरतें भी बढ़ रही हैं। राजधानी में बिजली की अधिकतम मांग 8,442 मेगावाट तक पहुंच गई है। वहीं, जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए बजट में 15% का प्रावधान किया गया है, ताकि हर घर तक साफ पानी पहुंच सके।
