Dehradun-Delhi Expressway Update: 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर एक बार फिर टाइमलाइन आगे खिसक गई है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक लंबे समय से इंतजार की जा रही इस परियोजना के 2026 की फरवरी तक चालू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले अक्टूबर 2025 की समयसीमा तय की गई थी, जबकि शुरुआती लक्ष्य दिसंबर 2024 था। निर्माण में हुई देरी के चलते अब इसका उद्घाटन सभी चरणों में पूरा निर्माण होने के बाद ही किया जाएगा।
पहले चरण से तीसरे चरण तक निर्माण लगभग पूरा
जानकारी के मुताबिक दिल्ली की तरफ से पहला चरण, जो अक्षरधाम से होते हुए गीता कॉलोनी, शास्त्री पार्क, मंडोला विहार और बागपत जिले के खेकरा तक जाता है, छह महीने से पूरी तरह तैयार है। दूसरा चरण, जो बागपत से सहारनपुर तक है, वह भी लगभग अंतिम स्टेज में है और कुछ हिस्सों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। तीसरे चरण में सहारनपुर बाईपास से गणेशपुर तक मौजूदा सड़क को चौड़ा किया जा रहा है और वह भी लगभग तैयार है। चौथे चरण में देहरादून इलाके के एलीवेटेड हिस्से पर सुरक्षा और फिनिशिंग का काम जारी है। मानसून के दौरान बरसाती नदी में आई बाढ़ के चलते कुछ सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे। NHAI के अधिकारियों के मुताबिक, डाटकाली मंदिर के पास सुरक्षा कार्य, मोबाइल टावर इंस्टालेशन और टनल फिनिशिंग जैसे काम नवंबर तक पूरे हो जाएंगे।
12 किलोमीटर के सेक्शन की सभी लेन खुली
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बारिश और बाढ़ की संभावित स्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर डाटकाली से गणेशपुर तक 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन तैयार किया है। यह हिस्सा बरसाती नदी के ऊपर बनाया गया है, जहां अब छह लेन में ट्रैफिक सुचारू रूप से चल रहा है। पहले बरसात के दौरान केवल तीन लेन खोली गई थीं।
एशिया का सबसे लंबा इको-कॉरिडोर
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर को जोड़ते हुए देहरादून तक जाता है। परियोजना की खासियत इसमें बनने वाला 12 किलोमीटर लंबा एलीवेटेड कॉरिडोर है, जो राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। इसे एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ-ओवरपास कॉरिडोर माना जा रहा है। इसके अलावा 6 एनिमल अंडरपास, 100 से ज्यादा अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज और कई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे से इंटरलिंक इसकी खासियत हैं।
पेड़ कटने को लेकर हुआ था विवाद
हालांकि, इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय विवाद भी जुड़े रहे हैं। सांसदों को दिए जवाब में सड़क परिवहन मंत्रालय ने बताया कि परियोजना के लिए 17,913 पेड़ काटे या स्थानांतरित किए गए। बदले में 50,600 नए पेड़ लगाने का दावा किया गया और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वन विभागों को 40 करोड़ रुपये दिए गए। NGT ने मार्च में NHAI पर पर्यावरण संबंधी जानकारी समय पर न देने पर जुर्माना भी लगाया था। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो फरवरी दिल्ली से देहरादून की यात्रा करीब 6 घंटे से घटकर 2.5 घंटे रह जाएगी।
