देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को जोड़ने के लिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भी कहा जा रहा है और लंबे समय से लोगों को इसका काम पूरा होकर आम जनता के लिए खोले जाने का इंतजार है। अब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लेकर जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है। क्योंकि अप्रैल-मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के दौरे पर जा सकते हैं। पीएम मोदी इसी दौरान Delhi Dehradun Expressway का उद्घाटन भी कर सकते हैं।
ज्ञात हो कि इस 210 किमी लंबे इकोनॉमिक कॉरिडोर की आधारशिला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही दिसंबर 2021 में रखी थी। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और देहरादून के अलावा बागपत, बड़ौत और सहारनपुर को भी आपस में जोड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और देहरादून के बीच की मौजूदा दूरी को 280 किमी से घटाकर 210 किमी कर देगा। इस एक्सप्रेसवे के साथ दो और स्पर या लिंक रोड भी जोड़े जा रहे हैं। जिनमें से एक करीब 51 किमी लंबा सहारनपुर-रुड़की-हरिद्वार एक्सप्रेसवे है और दूसरा 121 किमी लंबा 6 लेन का अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का क्या महत्व है?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय को आधे से भी कम कर देगा। फिलहाल दिल्ली और देहरादून के बीच के 280 किमी के सफर को तय करने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। इस एक्सप्रेसवे के खुल जाने के बाद दोनों शहरों की दूरी 70 किमी कम होकर 210 किमी रह जाएगी और इस सफर में लगने वाला समय भी मात्र ढाई घंटे का रह जाएगा। एक्सप्रेसवे के खुल जाने से न सिर्फ पर्यटकों को बल्कि, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा। इस एक्सप्रेसवे के खुल जाने के बाद दोनों शहरों को जोड़ने वाले अन्य हाईवे और रूटों पर भी ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
पर्यटन और धार्मिक यात्रा होगी आसान
टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। चारधाम यात्रा, हिल स्टेशनों और एडवेंचर टूरिज्म के लिए उत्तराखंड की अपनी अलग पहचान है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के खुल जाने से मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून जैसे शहरों तक पहुंचना आसान होगा। इस एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी में जो सुधार होगा, उसका असर राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या पर भी पड़ेगा। विशेष तौर पर चारधाम यात्रा के सीजन में स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।
स्थानीय व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन का संबंध सिर्फ तेजी से यात्रा से नहीं है। बल्कि यह सरकार के उस दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है, जिसके तहत पहाड़ी राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए अच्छी सड़कों का सीधा मतलब स्वास्थ्य सेवाओं तक तेजी से पहुंच के साथ शिक्षा और व्यापार की संभावनाएं बढ़ाना भी है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के खुल जाने से पर्यटन, होटल व्यवसाय और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
| प्रोजेक्ट का नाम | दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरि़डोर |
| कुल लंबाई | लगभग 210 किलोमीटर |
| सफर में लगने वाला समय | 5-6 घंटे से घटकर करीब 2.5 घंटे |
| किन शहरों को जोड़ेगा | दिल्ली, बागपत, बड़ौत, सहारनपुर, देहरादून |
| क्या फायदे होंगे | पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी में सुधार |
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के राजनीतिक मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के लिए अपने प्यार को कई बार खुले तौर पर दर्शा चुके हैं। उत्तराखंड में भाजपा हमेशा से मजबूत स्थिति में रही है और अभी लगातार सरकार में बनी हुई है। इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से लोगों में संदेश दिया जाएगा कि कैसे सरकार उनसे किए वादों को पूरा करने के लिए तत्पर है। फिर अगले साल यानी 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, जिसके लिए अभी से ही मतदाताओं के बीच पॉजिटिव संदेश देने की शुरुआत करनी होगी।
