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सावधान : कहीं आपका नौकर भी न लगा दे चूना, UPI से मालिक के उड़ाए लाखों रुपये; पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी

दिल्ली पुलिस ने मालिक के मोबाइल से UPI के जरिए साढ़े नौ लाख रुपये ट्रांसफर कर चुराने के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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मालिक के रुपये चुराने के मामले में आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली : उत्तरी जिला की साइबर पुलिस टीम ने कपड़ा व्यापारी के साथ हुई लाखों रुपये की ठगी के मामले को सुलझाते हुए 19 वर्षीय आरोपी कर्मचारी अभिषेक को नोएडा से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। आरोपी पीड़ित व्यापारी की दुकान पर काम करता था और उसने पहले मालिक का विश्वास जीता, फिर व्यापार से संबंधित ऑनलाइन लेनदेन और ट्रांजैक्शन करने के बहाने मिले मोबाइल फोन का गलत इस्तेमाल कर विश्वासघात किया।

मालिक के मोबाइल से की अंधाधुंध ऑनलाइन शॉपिंग

जानकारी के मुताबिक, आरोपी के मन में लालच आ गया और उसने मालिक के मोबाइल फोन में मौजूद यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल कर न सिर्फ लाखों रुपये की अंधाधुंध ऑनलाइन खरीदारी की, बल्कि बड़ी रकम दूसरे खातों में भी ट्रांसफर कर ली। इस तरह आरोपी ने धीरे-धीरे व्यापारी के खाते से कुल 9.5 लाख (साढ़े नौ लाख) उड़ा दिए। जब पीड़ित को धोखाधड़ी का पता चला तो उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस ने आरोपी के खाते में जमा 5 लाख फ्रीज करवा दिए और उसके पास से 1 लाख 20 हजार नकद बरामद कर लिए।

रिकवरी के लिए आरोपी से लगातार पूछताछ

मामले की जानकारी देते हुए एडिशनल डीसीपी पुखराज कमल गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी बची रकम की रिकवरी के लिए आरोपी से लगातार पूछताछ और आगे की जांच की जा रही है। आरोपी के संपर्क में और कौन शामिल था, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने यूपीआई पेमेंट संबंधी ट्रांजैक्शन को लेकर सतर्क किया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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