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Delhi Budget 2026:'अनमोल' योजना से जेनेटिक बीमारियों की होगी जांच, खुलेंगे 750 नए आरोग्य मंदिर; जानें बजट में स्वास्थ्य के लिए क्या है खास

दिल्ली के बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बार कई बड़ी योजनाएं और घोषणाएं है। 12,645 करोड़ के भारी-भरकम आवंटन के साथ सरकार ने नवजात शिशुओं से लेकर ट्रांसजेंडर समुदाय तक, हर वर्ग के लिए सुरक्षा कवच तैयार किया है। आइए जानते हैं दिल्ली के बजट में स्वास्थ्य के लिहाज से क्या है खास।

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स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली के बजट में क्या (चित्र साभार: Delhi Assembly Television)

Photo : Times Now Digital

Delhi Budget 2026: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज मंगलवार को दिल्ली का स्वास्थ्य बजट पेश किया। इस साल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 12,645 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राजधानी में आधुनिक इलाज अब किसी खास वर्ग का नहीं, बल्कि हर दिल्लीवासी का बुनियादी हक होगा।

'अनमोल' योजना: एक बूंद खून से बचेगा बचपन

बजट की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा 'अनमोल योजना' है। अक्सर नवजात बच्चों में कुछ जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारियां छिपी होती हैं, जिनका पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है। सरकार ने इसके लिए 25 करोड़ का बजट रखा है। अब नवजात शिशुओं के खून की महज एक बूंद से 56 तरह के टेस्ट मुफ्त किए जाएंगे। इससे जन्मजात बीमारियों का समय रहते पता चल सकेगा और हजारों बच्चों को समय पर इलाज मिल सकेगा। यह योजना दिल्ली के परिवारों के लिए एक 'जीवनदान' की तरह है।

770 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर

बड़े अस्पतालों की भीड़ कम करने और प्राथमिक चिकित्सा को घर के पास लाने के लिए सरकार ने 1,500 करोड़ का प्रावधान किया है। दिल्ली में पहले से चल रहे 370 आरोग्य मंदिरों की सफलता के बाद, इस साल 770 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे। यानी अब छोटी-मोटी बीमारियों, ब्लड टेस्ट और परामर्श के लिए आपको घंटों लाइन में नहीं लगना होगा।

ट्रांसजेंडर समुदाय को भी 'आयुष्मान' का सहारा

समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसे अक्सर स्वास्थ्य सुविधाओं में नजरअंदाज कर दिया जाता है। ट्रांसजेंडर समुदाय को अब आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इसके लिए 202 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं, ताकि उन्हें सम्मानजनक और मुफ्त इलाज मिल सके।

नया ट्रॉमा सेंटर और रिस्पॉन्स सेंटर

सड़कों पर होने वाले हादसों में 'गोल्डन ऑवर' (चोट लगने के बाद का पहला घंटा) सबसे कीमती होता है। इसे ध्यान में रखते हुए, जीटीबी अस्पताल में 200 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक नया ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। पूरी दिल्ली के लिए 10 करोड़ से इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर तैयार होंगे, जो किसी भी आपदा या बड़े हादसे के समय राहत कार्यों का नेतृत्व करेंगे।

अधूरे सपनों को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिल्ली के सत्यवादी राजा हरिशचंद्र हॉस्पिटल और लोकनायक जय प्रकाश नारायण हॉस्पिटल जैसे कई सरकारी अस्पतालों के रुके हुए या निर्माणाधीन कार्यों को पूरा करने के लिए 515 करोड़ का विशेष फंड दिया गया है। इसके साथ ही, 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉक भी बनाए जाएंगे, ताकि गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर और ICU की कमी का सामना न करना पड़े।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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