Punjab: मोगा में युद्ध नशे के खिलाफ कार्यक्रम; मुख्य सचिव और डीजीपी के मंच साझा करने पर सियासी हलचल तेज
- Reported by: मनोज कुमार Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Feb 16, 2026, 11:55 PM IST
पंजाब सरकार ने मोगा में युद्ध नशे के खिलाफ एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कई कैबिनेट मंत्री मौजूद थे। लेकिन इस कार्यक्रम में मुख्य सचिव और डीजीपी के मंच साझा करने को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। विपक्षी दलों ने इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाने का विषय बना दिया है।
एंटी-ड्रग इवेंट में अधिकारियों के स्टेज शेयर करने पर पंजाब में राजनीतिक विवाद छिड़ा
Punjab Anti Drug Campaign Moga: पंजाब सरकार ने मोगा में युद्ध नशे के विरुद्ध कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें मुख्यमंत्री भगवत मांग के साथ पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और कैबिनेट के तमाम मंत्री मौजूद रहे। यहां तक तो बात ठीक थी, लेकिन इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी ने भी मंच सांझा कर लोगों को संबोधित किया। बस अब यही बात पंजाब में सियासी चर्चा का विषय तो बन ही गई, अब इस बात को लेकर तमाम विरोधी दलों के निशाने पर आप सरकार की नशे के खिलाफ मुहिम निशाने पर आ गई, वहीं मुख्य सचिव और डीजीपी भी मंच सांझा करने को लेकर निशाने पर आ गए हैं।
अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग ने क्या कहा?
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग ने सोशल मीडिया एक्स पर सरकार और प्रशासन को निशाने पर लेते हुए लिखा कि रैली के लिए 890 सरकारी बसें डाइवर्ट की गई। चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी एक राजनीतिक मंच को संबोधित करते हैं। पटवारी, बीडीपीओ, पंचायत सचिव और अन्य सरकारी अधिकारियों,आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लोगों को रैली में लाने का काम सौंपा गया। इस आयोजन के बिल का भुगतान राजकोष द्वारा किया जाएगा। उन्होंने इसको सरकार के पीआर प्रैक्टिस के तौर पर बताया है।
नेता विपक्ष बाजवा के निशाने पर आई सरकार?
कांग्रेस नेता और नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब में एडमिनिस्ट्रेटिव न्यूट्रैलिटी के खतरनाक रूप से खत्म होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने करीब 890 सरकारी बसों के डायवर्जन और चीफ सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस की पॉलिटिकल स्टेज पर मौजूदगी पर सवाल उठाया। बाजवा ने कहा, "गवर्नेंस पॉलिटिकल एंडोर्समेंट का तमाशा नहीं बन सकती," उन्होंने आगे कहा कि चीफ मिनिस्टर भगवंत मान और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP के एक पार्टी इवेंट में राज्य के रिसोर्स और टॉप अधिकारियों की कथित तैनाती नागरिकों और सिविल सर्वेंट्स दोनों के लिए एक परेशान करने वाला मैसेज देती है। "जब सरकार और पार्टी के बीच की लाइनें धुंधली होने लगती हैं, तो पब्लिक लाइफ में ईमानदारी सबसे पहले खत्म होती है, और आखिर में टैक्सपेयर को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष ने क्या कहा?
इधर इस मामले को लेकर पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने भी सोशल मीडिया एक्स पर लिखते हुए आप सरकार के साथ ही मुख्य सचिव और डीजीपी को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की रैली मैं मुख्य सचिव और डीजीपी को देखकर आश्चर्य होता है कि क्या भारत के "स्टील फ्रेम"नौकरशाह अब राजनीतिक सनक के आगे झुक गए हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा है कि क्या यह अखिल भारतीय सेवा नियमों का घोर उल्लंघन नहीं है?
अकाली दल ने क्या कहा ?
शिरोमणि अकाली दल ने भी अपना बयान इसको लेकर जारी करते हुए राज्यपाल और चुनाव आयोग से मोगा में आम आदमी पार्टी की रैली आयोजित करने के लिए सरकारी फंड के दुरुपयोग करने पर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। पार्टी के वरिष्ठ ने डॉ दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि रैली पर खर्च की गई पूरी राशि आम आदमी पार्टी से वसूल की जानी चाहिए। वहीं उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को राजनीतिक रैली को संबोधित करने के लिए मजबूर किए जाने की भी कड़ी निंदा की है।
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