Chhindwara News: स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं का उद्देश्य लोगों की जान बचाना होता है, लेकिन जब किसी दवा की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया या उसकी निगरानी में गंभीर चूक सामने आए तो उसका खामियाजा मरीजों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में सामने आया Coldrif कफ सिरप मामला ऐसी ही दर्दनाक घटना के तौर पर सामने आया था।
इस मामले में कई बच्चों की मौत हुई और दवा की गुणवत्ता से लेकर सरकारी निगरानी व्यवस्था तक पर गंभीर सवाल उठे। छिंदवाड़ा के परासिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित बच्चों को इलाज के दौरान Coldrif कफ सिरप दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों में पेशाब रुकने और किडनी फेलियर जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए। घटना में 26 बच्चों की मौत की बात सामने आई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
एक साल बाद अधिकारियों की बहाली से फिर उठे सवाल
मामले में शुरुआती जांच के बाद दो अधिकारियों शरद जैन और गौरव शर्मा को 6 अक्टूबर 2025 को निलंबित किया गया था। दोनों पर दवा की गुणवत्ता और नियामकीय निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां थीं। अब 23 सितंबर 2026 को जारी एक सरकारी आदेश के जरिए दोनों अधिकारियों की बहाली कर दी गई। हालांकि, बहाली की जानकारी सामने आने के बाद दोनों को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने नाराजगी जताई है और सवाल उठाया है कि जब मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, तो अधिकारियों को बहाल करने का फैसला क्यों लिया गया।
मंत्री की जानकारी के बिना आदेश का दावा
मामले में एक और सवाल यह उठ रहा है कि अधिकारियों की बहाली का आदेश विभागीय मंत्री की जानकारी के बिना कैसे जारी हुआ। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि विभागीय मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में जानकारी मांगी है और यह पता किया जा रहा है कि उनकी जानकारी के बिना ऐसा आदेश कैसे जारी हुआ। वहीं, जब इस मामले में विभागीय मंत्री से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने घर से बाहर निकलकर इस मुद्दे पर जवाब देने से इनकार कर दिया।
कांग्रेस ने उठाया जिम्मेदारी तय करने का सवाल
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने कहा कि भागीरथपुरा में हुई मौतों और छिंदवाड़ा में 26 बच्चों की मौत के मामलों में अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है और कार्रवाई कब तक पूरी होगी।
वेदांत के परिवार को अब भी न्याय का इंतजार
इस घटना में जान गंवाने वाले दो साल के वेदांत के पिता कपिल पंवार आज भी न्याय की मांग कर रहे हैं। वेदांत की मौत के करीब एक साल बाद जब उन्हें आरोपी अधिकारियों की बहाली की जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, उन्हें इस तरह बहाल नहीं किया जाना चाहिए था।
Coldrif मामले में कहां-कहां सामने आई लापरवाही?
इस पूरे मामले की जांच में दवा के निर्माण से लेकर उसकी निगरानी और इस्तेमाल तक कई स्तरों पर सवाल उठे।पहला स्तर- दवा निर्माण:
जांच में तमिलनाडु स्थित Sreesan Pharmaceuticals द्वारा तैयार Coldrif कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। जांच में पाया गया कि कंपनी ने बिना उचित परीक्षण के ही दवा का निर्माण और वितरण किया।
दूसरा स्तर- नियामकीय निगरानी:
दवा के बाजार में आने से लेकर उसकी सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग तक, ड्रग इंस्पेक्टरों और नियामक निकायों की घोर लापरवाही उजागर हुई। इसी मामले में शरद जैन और गौरव शर्मा को सस्पेंड किया गया।
तीसरा स्तर- दवा लिखने की प्रक्रिया:
कई स्थानीय डॉक्टरों ने बिना किसी मानक जांच या बिना सही जांच के दवा लिख दी गई। डॉ प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया, वो फिलहाल जेल में हैं।
SIT ने संभाली जांच, Coldrif का स्टॉक जब्त
मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। इसके साथ ही Coldrif कफ सिरप के स्टॉक को जब्त कर राज्य में इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई। अब अधिकारियों की बहाली के बाद इस पूरे मामले में एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल यही है कि 26 बच्चों की मौत की जिम्मेदारी आखिर कब और किस स्तर पर तय होगी? पीड़ित परिवारों की नजर अब जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
