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Delhi Police Action: 400 CCTV कैमरे, चश्मा और AI का कनेक्शन! मास्क पहनकर हिंसा फैलाने वालों की ऐसे हो रही पहचान

Jantar Mantar Violence: जंतर-मंतर के प्रदर्शन में 20 जुलाई को हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस का एक्शन तेज हुआ है। FRS से 2,873 लोगों की पहचान के बाद अब मास्क पहने उपद्रवियों की तलाश की जा रही है।

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मास्क पहनकर उपद्रव करने वालों पर कसा शिकंजा

Photo : Times Now Digital

Delhi Protest Violence: दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुई हिंसा को लेकर जांच अब और तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस अब फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 2,873 लोगों की पहचान करने के बाद अब उन लोगों पर फोकस कर रही है, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान मास्क पहनकर उपद्रव किया था। पुलिस का मानना है कि कई लोग जानबूझकर अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे ढककर पहुंचे थे।

CCTV फुटेज को खंगाल रही पुलिस

जांच में जुटी पुलिस प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड हुए कई वीडियो और CCTV फुटेज को खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, वीडियोज में साफ दिखाई दे रहा है कि चेहरे पर मास्क लगाए कुछ लोग पुलिसकर्मियों पर लाठी-डंडों से हमला कर रहे हैं। इन्हीं वीडियो के आधार पर ऐसे लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस करीब 400 CCTV कैमरों की फुटेज का विश्लेषण कर रही है। अलग-अलग कैमरों में कैद तस्वीरों और वीडियो को जोड़कर मास्क पहने लोगों की गतिविधियों का पूरा सीक्वेंस तैयार किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये लोग कहां से आए, किस रास्ते से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे, किन लोगों के संपर्क में रहे और हिंसा के बाद कहां गए।

तैयारी के साथ पहुंचे थे प्रदर्शनकारी

जांच के दौरान एक और अहम पहलू सामने आया है। पुलिस को शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आंसू गैस के असर को कम करने के तरीकों के बारे में किसी AI प्लेटफॉर्म पर जानकारी खोजी गई थी। इसी एंगल से भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी भी AI प्लेटफॉर्म का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग सामान्य प्रदर्शनकारियों की तरह नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। कई लोगों ने हाईटेक फेस मास्क और सेफ्टी गॉगल्स पहन रखे थे, जिससे आंसू गैस और धुएं के असर से बचा जा सके। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल पहले से तय योजना का हिस्सा था या नहीं।

इसके अलावा, गीले जूट के बैग के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या यह भी आंसू गैस के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा था।

डिजिटल सबूतों से हो रही जांच

दिल्ली पुलिस अब इस पूरे मामले में डिजिटल सबूतों पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पर अपलोड की गई क्लिप, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका तय की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की पहचान होगी, उनके खिलाफ उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियों का कहना है कि हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

Mohit Om
मोहित ओमauthor

जनमानस की खबर को पाठकों तक पहुंचाना ही एकमात्र लक्ष्य। एक दशक से ज्यादा पत्रकारिता का अनुभव। अपराध के पीछे की साजिश को बेपर्दा करने वाली हर खबर पर पैनी निगाह रखता हूँ।

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