चण्डीगढ़

Unmarried Pension: अब अविवाहितों को भी पेंशन देगी हरियाणा सरकार, जल्द शुरू हो सकती है योजना

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 4, 2023, 10:41 AM IST

Unmarried Pension Scheme: हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया है कि योजना का लाभ महिला व पुरुष दोनों तरह के अविवाहितों को दिया जाएगा। हालांकि, पेंशन कितनी मिलेगी और किस तरह मिलेगी, इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।

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अविवाहित पेंशन योजना शुरू कर सकती है हरियाणा सरकार

Photo : BCCL

Unmarried Pension Scheme: हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार अब अविवाहितों को भी पेंशन देने की तैयारी में है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि एक महीने के अंदर इस मसले पर फैसला ले लिया जाएगा। इस योजना के तहत उन लोगों को लाभ मिलेगा, जिनकी अब तक शादी नहीं हुई है। योजना के पात्रों में 45 से 60 साल के अविवाहित आ सकते हैं।

हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया है कि इस योजना का लाभ महिला व पुरुष दोनों तरह के अविवाहितों को दिया जाएगा। हालांकि, पेंशन कितनी मिलेगी और किस तरह मिलेगी, इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। कहा गया है कि एक बार पेंशन योजना को मंजूरी मिलने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।

सालाना आय और हरियाणा का निवासी जैसी शर्तें

हरियाणा में जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, पेंशन के तहत वही अविवाहित आएंगे जो हरियाणा के निवासी होंगे और उनकी सालाना आय 1.80 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जानकारी के मुताबिक, करीब 1.25 लाख लोगों को इस योजना का लाभ मिल सकता है।

मिल सकती है तीन हजार तक पेंशन

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अविवाहित पेंशन योजना के तहत मिलने वाली रकम तीन हजार रुपये तक हो सकती है। दरअसल, सरकार की ओर से बुढ़ापा पेंशन के तौर पर इतनी ही रकम दी जाती है। इसके अलावा हरियाणा की खट्टर सरकार विधुर पेंशन योजना भी लाने की तैयारी में है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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