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ओडिशा में पाठ्यपुस्तक विवाद: 7 दिन से भूख हड़ताल पर युवा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार के सामने कई बार इन समस्याओं को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। मैनवर अली ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं,तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।

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ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद को लेकर आंदोलन जारी।

ओडिशा की स्कूल पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों और अनियमितताओं को लेकर भुवनेश्वर में आंदोलन तेज हो गया है। नवनिर्माण युवा छात्र संगठन के राज्य संयोजक मैनवर अली पिछले 7 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। मैनवर अली और संगठन की ओर से राज्य की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इनमें खास तौर पर कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में कथित स्पेलिंग,व्याकरण, तथ्यात्मक और वैचारिक गलतियों का मुद्दा शामिल है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार के सामने कई बार इन समस्याओं को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। मैनवर अली ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं,तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। इस दौरान उन्होंने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की भी मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते, वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

अली ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, CPI और CPI(M) समेत कई राजनीतिक दलों ने उनके आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ राजेंद्र सिंह राणा ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है और वह ओडिशा पहुंचे हैं। मैनवर अली ने पाठ्यपुस्तक मामले में करीब ₹380 करोड़ की अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत ओडिशा में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इसी दौरान कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में 1,678 स्पेलिंग और व्याकरण संबंधी गलतियां, तथ्यात्मक त्रुटियां, गलत शब्दावली और वैचारिक गलतियां सामने आने की बात कही गई है।

इस मामले में 55 पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं। इनमें साहित्य, सामाजिक विज्ञान, गणित, भूगोल और स्किल एजुकेशन के अलावा हिंदी, संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी की किताबें भी शामिल हैं। इन किताबों को Directorate of Teacher Education और SCERT की ओर से Odisha Curriculum Framework for School Education 2025 के तहत तैयार किया गया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 5.3 लाख नहीं बल्कि 53 लाख छात्रों के लिए 2.96 करोड़ प्रतियां छापी गईं। इन किताबों की छपाई पर करीब ₹380 करोड़ खर्च होने की बात सामने आई है। ये किताबें राज्य के 49,259 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए तैयार की गई थीं।गलतियों का मामला सामने आने के बाद OSEPA ने जिला शिक्षा अधिकारियों को 122 पन्नों का पत्र जारी किया, जिसमें 115 पन्नों का corrigendum भी शामिल था। शिक्षकों को इन सुधारों के आधार पर कक्षा में पढ़ाने का निर्देश दिया गया।

अब मैनवर अली की लगातार जारी भूख हड़ताल के बाद सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। सवाल यही है कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर इस विवाद का समाधान निकालेगी, या आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा रूप लेगा?

Satish Kumar Dash
Satish Kumar Dashauthor

Satish Kumar Dash is a reporter from Odisha with 5 years of journalism experience, including 2.5 years at Times Now Navbharat.

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