बिजनेस

Salary बढ़ते ही तुरंत न बदलें अपना लाइफस्टाइल! समझें खर्च बढ़ाने से पहले Emergency Fund बढ़ाना क्यों जरूरी?

बहुत से नौकरीपेशा सैलरी बढ़ते ही अपने लाइफस्टाइल को अपग्रेड कर लेते हैं। लेकिन क्या सैलरी बढ़ते ही तुरंत लाइफस्टाइल में बदलाव करना एक समझदारी वाला फैसला साबित हो सकता है?

Image

सैलरी बढ़ने पर तुरंत न करें लाइफस्टाइल अपग्रेड, जानिए क्यों (Photo: iStock)

नौकरीपेशा लोगों की सैलरी बढ़ते ही खर्च करने की क्षमता बढ़ जाती है। इनकम बढ़ते ही नया महंगा फोन, महंगे कपड़े, बाहर खाना, घूमना या बड़ी कार जैसी चीजों पर खर्च करने का मन होने लगता है। इसे लाइफस्टाइल अपग्रेड कहा जा सकता है। हालांकि, सैलरी बढ़ने के तुरंत बाद पूरा अतिरिक्त पैसा खर्च करने के बजाय पहले आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना ज्यादा जरूरी है। खासतौर पर इमरजेंसी फंड को बढ़ाना भविष्य के अचानक आने वाले खर्चों को संभालने में मदद कर सकता है।

सैलरी बढ़ते ही खर्च बढ़ाना क्यों ठीक नहीं?

सैलरी (Salary) बढ़ने के बाद अगर हर अतिरिक्त रुपये को नए खर्चों में लगा दिया जाए, तो कुछ समय बाद बढ़ी हुई इनकम भी कम लगने लगती है। उदाहरण के लिए, पहले 50 हजार रुपये की सैलरी में जो खर्च आराम से चलता था, वह सैलरी 60 हजार होने के बाद भी मुश्किल लग सकता है। इससे सेविंग बढ़ने के बजाय सिर्फ लाइफस्टाइल का खर्च बढ़ता रहता है।

पहले इमरजेंसी फंड को मजबूत करें

इमरजेंसी फंड ऐसी रकम होती है, जिसे अचानक नौकरी जाने, मेडिकल खर्च, घर की जरूरी मरम्मत या किसी दूसरी अप्रत्याशित स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। सैलरी बढ़ने के बाद सबसे पहले इस फंड में योगदान बढ़ाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। इससे किसी आपात स्थिति में निवेश तोड़ने या कर्ज लेने की जरूरत कम हो सकती है।

कितने महीने के खर्च का फंड रखें?

इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) की जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति को नौकरी की स्टेबिलिटी, परिवार की जिम्मेदारियां, मासिक खर्च और दूसरे वित्तीय दायित्वों को ध्यान में रखना चाहिए। सामान्य तौर पर कई लोग 6 महीनों के जरूरी खर्च के बराबर रकम अलग रखते हैं। अगर पहले से इमरजेंसी फंड बना हुआ है, तो सैलरी बढ़ने के बाद बढ़े हुए मासिक खर्च के हिसाब से उसकी समीक्षा भी करनी चाहिए।

बढ़ी सैलरी को ऐसे करें मैनेज

सैलरी बढ़ने पर पूरी बढ़ोतरी को खर्च करने के बजाय उसका एक हिस्सा इमरजेंसी फंड, एक हिस्सा निवेश और बाकी रकम लाइफस्टाइल अपग्रेड के लिए रखा जा सकता है।

लाइफस्टाइल अपग्रेड करें, लेकिन प्लान के साथ

इसका मतलब यह नहीं है कि सैलरी बढ़ने के बाद अपनी इच्छाओं पर बिल्कुल खर्च न करें। बेहतर तरीका यह है कि पहले आर्थिक सुरक्षा मजबूत की जाए और फिर बजट के भीतर लाइफस्टाइल अपग्रेड किया जाए। इस तरह बढ़ी हुई सैलरी का फायदा सिर्फ आज की सुविधाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भविष्य की वित्तीय सुरक्षा में भी योगदान देता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article