Monsoon 2026 Update: देश में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदाई की दहलीज पर पहुंच गया है। मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही देश में बारिश की कमी को पूरा करने के लिए समय लगातार कम होता जा रहा है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 20 सितंबर तक देश में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में देशभर में 699.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस दौरान 822 मिमी बारिश दर्ज होती है। ऐसे में मानसून के अंतिम चरण में भी देश बारिश के औसत से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अगले 5-7 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू हो सकता है। इस दौरान दिल्ली-NCR में बड़ी बारिश की संभावना कम है, जबकि यूपी-बिहार में 25-28 सितंबर के बीच अच्छी बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।
दिल्ली में भारी बारिश का अलर्ट नहीं
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच से सात दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से से मानसून लौटना शुरू हो सकता है। इसके साथ ही बारिश का दौर भी कमजोर पड़ जाएगा। ऐसे में बारिश की कमी को पूरा करने की संभावना कम नजर आ रही है। दिल्ली-NCR में भी मानसून अंतिम दौर में पहुंच चुका है। लेकिन मानसून के बाकी दिनों में भी यहां तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना नहीं है। ऐसे में दिल्ली-NCR से राष्ट्रीय स्तर पर बारिश की कमी में बड़ी भरपाई करने की उम्मीद बेहद कम है।
यूपी-बिहार में बारिश के आसार
भले ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बारिश की उम्मीद बेहद कम है। लेकिन उत्तर भारत के कुछ राज्यों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार में 25 से 28 सितंबर के बीच तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। अगर इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो दोनों राज्यों को मानसून के आखिरी चरण में राहत मिल सकती है। हालांकि, देश की कुल बारिश की कमी पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह बारिश की तीव्रता और इसके दायरे पर निर्भर करेगा।
कई राज्यों में बारिश की कमी
IMD के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति में काफी अंतर नजर आ रहा है। मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य के आसपास रही है। लेकिन उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई इलाके अभी भी बारिश की कमी झेल रहे हैं। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां बारिश सामान्य से कम रिकॉर्ड की गई। वहीं मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य दायरे में दर्ज हुई।
मानसून की वापसी अब सबसे अहम
गौरतलब है कि मानसून किसी इलाके से वापस लौटने के बाद वहां व्यापक बारिश की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके बाद बारिश मुख्य रूप से कम दबाव वाले क्षेत्रों, वेदर सिस्टम और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में बादल छाए हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन केवल बादलों की मौजूदगी से लंबे समय तक बारिश होना जरूरी नहीं है। ऐसे में अगले 10 दिन देश के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर इस दौरान कुछ मजबूत बारिश के दौर आते हैं तो बारिश की कमी कम हो सकती है।
