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IRS अधिकारी से मारपीट के मामले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर को तीन महीने की सजा, छापेमारी के दौरान लगे थे गंभीर आरोप

CBI Officer Sentenced to Jail: लगभग 26 साल बाद, दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश गीर और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक पांडे को जेल की सजा सुनाई।

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IRS अधिकारी से मारपीट के मामले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर को तीन महीने की सजा, छापेमारी के दौरान लगे थे गंभीर आरोप

IRS Officer Assault Case: दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के दो अधिकारियों को दो दशक पहले एक छापेमारी के दौरान भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी के आवास में जबरन घुसने, मारपीट करने के आरोप में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने दोषी ठहराए गए सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वी के पांडे और रामनीश के खिलाफ सजा पर दलीलें सुनीं। रामनीश वर्ष 2000 में छापेमारी के समय पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। रामनीश इस समय सीबीआई में संयुक्त निदेशक हैं।

अदालत ने दोनों दोषियों पर 50,000-50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा दायर शिकायत में दोनों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 427 (शरारत) और 448 (आपराधिक अतिक्रमण) के तहत आरोप लगाए गए थे।

26 साल बाद मिली सजा

जहां लगभग 26 साल बाद मामले में दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश गीर और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक पांडे को 19 अक्टूबर 2000 को इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर किए गए एक विवादित तलाशी अभियान से जुड़े मामले में, तीन महीने की जेल की सजा सुनाई। यह मामला 19 अक्टूबर, 2000 की एक घटना से संबंधित है, जब सीबीआई की एक टीम ने पश्चिम विहार में अग्रवाल के आवास पर तलाशी और गिरफ्तारी अभियान चलाया था। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने तड़के उनके घर में जबरन प्रवेश किया, उनके साथ मारपीट की और गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया।

'निजी रंजिश'

शिकायत के अनुसार, CBI और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बिना किसी कानूनी वजह के, एक IRS अधिकारी के परिसर में जबरदस्ती प्रवेश किया। अग्रवाल, जो उस समय प्रभावशाली हस्तियों से जुड़ी संवेदनशील जांचों को देख रहे थे, उन्होंने दावा किया कि उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में झूठा फंसाया गया। शिकायत में यह संकेत दिया गया कि यह छापा वैध जांच के आधार पर नहीं, बल्कि निजी रंजिश के चलते मारा गया था और यह आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने उनके चौकीदार के साथ मारपीट की, परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया, और उन्हें जबरदस्ती उनके बेडरूम से बाहर खींचकर निकाला, जिससे उन्हें चोटें आईं। छापे के समय को लेकर भी चिंताएं उठीं, क्योंकि यह घटना एक ट्रिब्यूनल द्वारा उनके तबादले और निलंबन पर रोक लगाए जाने के कुछ ही समय बाद हुई थी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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