बिहार में आज का मौसम (10 Apr 2026): बिहार में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पिछले कुछ दिनों से हो रही झमाझम बारिश और ठंडी हवाओं के कारण जो 'मिले-जुले' सर्दी वाले अहसास थे, वे अब बीते दिन की बात होने वाले हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आज यानी 10 अप्रैल शुक्रवार से राज्य में गर्मी का नया दौर शुरू हो रहा है, जो अगले कुछ दिनों में लू (Heat Wave) की शक्ल ले सकता है।
10 जिलों में लू का अलर्ट (Bihar Weather Today)
बिहार के आसमान से अब बादल छंटने लगे हैं और सूरज के तेवर तल्ख होने वाले हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर प्रदेश के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की भारी वृद्धि हो सकती है। विशेष रूप से राजधानी पटना और मुजफ्फरपुर समेत 10 जिलों में लू जैसे हालात बनने की चेतावनी जारी की गई है। इन जिलों में पटना, मुजफ्फरपुर, गया, औरंगाबाद, कैमूर, डेहरी, नालंदा, भोजपुर, बक्सर और वैशाली शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पारा 40 डिग्री के पार जा सकता है। उमस (Humidity) और बढ़ते तापमान का कॉम्बिनेशन आम जनजीवन को खासा परेशान करेगा।कैमूर में मौसम का अजीब खेल
कैमूर जिले से मौसम का एक अनोखा आंकड़ा सामने आया है। यहां बुधवार और गुरुवार के बीच न्यूनतम और अधिकतम तापमान का अंतर लगभग खत्म हो गया। बुधवार रात 11 बजे जहां तापमान 27 डिग्री था, वहीं देर रात 1 बजे यह 22 डिग्री दर्ज किया गया। पिछले सप्ताह कैमूर का पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन बारिश के कारण इसमें गिरावट आई थी। अब विभाग का अनुमान है कि 12 और 13 अप्रैल को कैमूर में तापमान वापस 40 डिग्री के स्तर को छू लेगा।
कहीं बारिश, कहीं धूल भरी आंधी
हालांकि गर्मी बढ़ रही है, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बांग्लादेश तक बने एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के कारण बिहार के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज अब भी अस्थिर है। कुछ इलाकों में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलने के आसार हैं। पिछले 24 घंटों में जमुई में सबसे ज्यादा 40.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि किशनगंज में 46 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।
सावधानी की अपील
मौसम विभाग ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। नमी और बढ़ते तापमान के कारण 'हीट स्ट्रोक' का खतरा बढ़ जाता है। किसानों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह समय विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
