मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को डर नहीं लगता, अगर उन्हें डर लगता तो वो सरकार नहीं गिराते। तुलसी सिलावट ने ये ताज़ा बयान उज्जैन में दिया है। दरअसल तुलसी सिलावट उज्जैन में सिंहस्थ के लिए चल रही तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान वो खुद ही कान्ह डक्ट में उतर गए और वहां की गुणवत्ता की जांच की। इस डक्ट की गहराई करीब 100 फीट है। जिसमें उतरकर सिलावट ने काम की क्वालिटी बारीकी से चेक की। इतना ही नहीं वहां काम करने वाले मजदूरों की मिठाई खिलाकर हौसला अफज़ाई भी की। इसी दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि क्या उन्हें डर नहीं लगा तो उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से भय नहीं लगता, अगर लगता तो वो सरकार नहीं गिराते।
गौरतलब है कि मार्च 2020 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार गिर गई थी। उस दौरान खुद तुलसी सिलावट स्वास्थ्य मंत्री थे, सिंधिया के करीबी तुसली सिलावट समेत 6 मंत्रियों औऱ 13 विधायकों ने अचानक इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई। तुलसी सिलावट के ताज़ा बयान ने एक बार फिर से कांग्रेस के ज़ख्मों को कुरेदने का काम किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज़ का कहना है कि हम पहले से ये आरोप लगाते रहे हैं कि बीजेपी सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करती है, सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर सरकारें गिराई जाती हैं। तुलसी सिलावट बार बार इस बात को क्यों दोहराते हैं, दरअसल उन्हें इस बात का गिल्ट है कि उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से डर कर सरकार गिराई। वो और उनके साथी अगर उस समय निडर होते तो जनता को कांग्रेस और कमलनाथ जी का भय औऱ भ्रष्टाचार मुक्त शासन मिलता। ना कि महंगाई, बेरोज़गारी औऱ भ्रष्टाचार वाला बीजेपी शासन...
मामले में बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि तुलसी सिलावट जी आशय स्पष्ट है कि वो एक निर्भीक व्यक्ति हैं। इसलिए कमलनाथ की भ्रष्ट सरकार से त्यागपत्र देकर बीजेपी ज्वाइन करी। कमलनाथ की वो सरकार जिससे आम जनता पूरी तरह से त्रस्त हो गई थी।
अब इस बात के कई मायने निकाले जा सकते हैं। जैसे भय किससे था और क्यों था। और इस समय इस तरह के बयान की आखिर क्या आवश्यकता है। अब इसे लेकर राजनीति ज़रुर शुरू हो गई है।