भोपाल

भोपाल में बनेगा रिजर्वायर फिशरीज प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर, 20 स्टेट के मंत्री होंगे शामिल

भोपाल में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मध्यप्रदेश का पहला रिजर्वायर स्थापित किया जाएगा। इस मछली उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टर का उद्घाटन 13 जून को इंदौर से किया जाएगा।

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सीएम मोहन यादव (फाइल फोटो)

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मध्य प्रदेश का पहला रिजर्वायर भोपाल के पास हलाली में स्थापित किया जाएगा। इस फिशरीज प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर का उद्घाटन 13 जून को इंदौर में होगा। केन्द्र सरकार ने देश में इस योजना के तहत 17 क्लस्टरों की पहचान की है, जो विभिन्न क्षेत्रों की मत्स्य पालन की विशेषताओं के आधार पर विकसित किए जा रहे हैं। डॉ. यादव ने बताया कि यह बैठक देश में पहली बार इन-लैंड स्टेट्स के लिए आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य उन राज्यों में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना है जो समुद्र से नहीं जुड़े हैं।

20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री लेंगे भाग

दैनिक भास्कर की खबर के हवाले से प्राप्त जानाकारी के मुताबिक, इस बैठक में केवल उन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे जो समुद्री मत्स्य उत्पादन गतिविधियों में संलग्न नहीं हैं। इंदौर में होने वाली इस इन-लैंड फिशरीज एंड एक्वा कल्चर मीट में 20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री भाग लेंगे। इसमें मध्यप्रदेश के मछुआ पालन मंत्री नारायण सिंह पंवार, उत्तर प्रदेश के संजय कुमार निषाद, बिहार की रेणु देवी, हरियाणा के श्याम सिंह राणा, और राजस्थान के जवाहर सिंह बेधम जैसे मंत्री शामिल होंगे। बैठक में केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलाक्ष लिखी और संयुक्त सचिव सागर मेहरा भी उपस्थित रहेंगे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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