MP News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों को रोकने के लिए एक अहम क्षेत्रीय कार्यशाला यानी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला में न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि गुजरात सहित बाकी राज्यों के बाल अधिकार आयोगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा के लिए राज्यों के बीच ठोस रणनीति बनाना रहा।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि पॉक्सो एक्ट बच्चों की गरिमा और सुरक्षा की गारंटी है और इसकी जानकारी हर स्कूल, हर मोहल्ले और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के हर स्कूल में 15 दिन में एक बार पॉक्सो एक्ट पर जागरूकता सत्र आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि बच्चे अपने अधिकारों को पहचान सकें और सुरक्षित रह सकें।
सोशल मीडिया से बढ़ता खतरा
गुजरात बाल आयोग के सदस्य सचिव डॉ. दिनेश कपड़िया ने सोशल मीडिया को बच्चों की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से आपत्तिजनक कंटेंट तक पहुंच बना रहे हैं, जिससे यौन अपराधों की आशंका बढ़ रही है। इस पर रोक लगाने के लिए व्यापक और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
सीमावर्ती राज्यों की संयुक्त कार्य योजना
कार्यशाला में यह सहमति बनी कि मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र मिलकर एक संयुक्त कार्य योजना बनाएंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर कोई बच्चा एक राज्य से दूसरे राज्य में जाता है, तो उसकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा बनी रहे।
बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण जरूरी
मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र मोरे ने कहा कि पॉक्सो मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयोग वंचित वर्ग, विशेषकर प्रवासी मजदूरों के बच्चों पर विशेष ध्यान दे रहा है।
सरकार की योजनाएं और पहल
मंत्री भूरिया ने बताया कि राज्य सरकार ने 137 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित की हैं। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत 435 अनाथ बच्चों को आर्थिक सहायता दी गई है, जबकि मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत 13,146 बच्चों को सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने बाल संरक्षण नीति 2020 को अधिसूचित किया।
