Chhindwara Cough Syrup Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में संदिग्ध कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सिरप बनाने वाली तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित मेसर्स श्रेसन फॉर्मास्युटिकल कंपनी और दवा लिखने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जिसके बाद पुलिस ने डॉ. सोनी को हिरासत में ले लिया है और उन्हें निलंबित भी कर दिया गया है। यह कदम स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच के बाद उठाया गया, जिसमें कफ सिरप की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे।
छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडे न बताया कि चेन्नई की फार्मासिटीकल कंपनी और डॉ. प्रवीण सोनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि डॉ. सोनी यहां सरकारी डॉक्टर होने के बावजूद एक निजी क्लिनिक चलाते थे और उन्होंने सिरप लेने का परामर्श दिया था। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कोतवाली पुलिस की एक विशेष टीम ने डॉ. सोनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शनिवार देर रात छिंदवाड़ा के राजपाल चौक से उन्हें गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने लापरवाही भरा रवैया दिखाया और लगभग एक महीने तक बच्चों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव के बाद भी दवा लिख दी। इस मामले में जांच के लिए एसआईटी बना दी गई है। जल्दी ही पुलिस टीम चेन्नई रवाना होगी, जहां फार्माशूटिकल कंपनी के लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी।
डॉ. प्रवीण सोनी तत्काल प्रभाव से निलंबित
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर छिंदवाड़ा जिले के परासिया में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्हें बच्चों के उपचार में बरती गई लापरवाही के लिए निलंबित किया गया है।। डॉ. प्रवीण सोनी को निलंबन के बाद क्षेत्रीय कार्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर में अटैच किया गया।
जांच में सिरप की क्वालिटी संदिग्ध पाई गई
परासिया बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर पुल ने फार्मा कंपनी और छिंदवाड़ा के डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित फार्मा कंपनी द्वारा बनाई गई सिरप की क्वालिटी संदिग्ध थी, जिस कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 279 (औषधियों का मिश्रण), 105 (आपराधिक मानव वध), और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 27(ए) के तहत मामला दर्ज किया है।
कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर MP में लगा बैन
मध्यप्रदेश सरकार ने शनिवार को पूरे प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। आशंका जताई जा रही है कि इस कफ सिरप को पीने के बाद किडनी फेल होने के कारण बच्चों की मौत हुई। इसकी जांच में पाया गया है कि सिरप में अत्यधिक जहरीला तत्व मौजूद था।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इस घटना के बाद देश के छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक्स समेत 19 दवाओं निर्माण इकाइयों में जोखिम आधारित निरीक्षण (risk-based inspections) भी शुरू कर दिए हैं। तमिलनाडु के दवा परीक्षण प्रयोगशाला (Drug Testing Laboratory, Chennai) में कोल्ड्रिफ सिरप का एक नमूना जांच के लिए भेजा गया, जिसे राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय ने “मानक गुणवत्ता का नहीं” (Not of Standard Quality) घोषित किया।
छिंदवाड़ा में अब तक 14 बच्चों की मौत
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में संदिग्ध किडनी फेल होने के कारण 7 सितंबर से अब तक 14 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से 10 मौतें परासिया उपखंड में दर्ज की गईं। शनिवार सुबह परासिया की 2 साल की बच्ची योगिता की नागपुर के अस्पताल में मौत हो गई। फिलहाल 6 बच्चों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। जिनमें से 5 नागपुर और 1 छिंदवाड़ा में है। नागपुर में भर्ती 3 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
