Bhiwandi Thane News: ठाणे जिले के मुस्लिम बहुल क्षेत्र भिवंडी में आयोजित गणेशोत्सव कार्यक्रम में पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कई मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखी। 'धामणकर नाका मित्र मंडल' के अध्यक्ष संतोष शेट्टी के निमंत्रण पर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से हिंदू एकजुटता, धार्मिक आस्था और हिंदू राष्ट्र की बात को दोहराया। कार्यक्रम में करीब ढाई घंटे की देरी से पहुंचने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भिवंडी स्थित एक स्थानीय मठ में श्रद्धालुओं से मुलाकात कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें पहुंचने में विलंब हुआ।
'बाकी लाहौर के हैं?'
कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सवाल किया कि उनमें से कितने लोग नियमित रूप से मठों में दर्शन के लिए जाते हैं और उन्हें हाथ उठाने को कहा। जब पांडाल में मौजूद आधे से अधिक लोगों ने हाथ नहीं उठाया, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए तीखा तंज कसा कि मठ में कितने लोग जाते हैं, हाथ उठाओ... क्या बाकी लोग लाहौर के हैं? उनके इस बयान पर वहां मौजूद श्रद्धालुओं और दर्शकों के बीच जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली।
हिंदू राष्ट्र पर फिर दिया जोर
अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र भिवंडी के मंच से संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के 'हिंदू राष्ट्र' की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण के लिए हिंदू समाज को एकजुट होना अनिवार्य है। भगवान श्री राम के प्रति आस्था प्रकट करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "जो राम का नहीं, वो किसी काम का नहीं।"
'सोने की खड़ाऊ' पर दी सफाई
हाल ही में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान उनके पैरों में 'सोने की चप्पल' होने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स पर धीरेंद्र शास्त्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनके साथ मौजूद लड़के की सामान्य खड़ाऊ को रातों-रात 'सोना' बनाकर पेश कर दिया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में लोगों को सलाह दी कि मीडिया में चलने वाली हर भ्रामक खबर पर भरोसा करने से बचना चाहिए।
गणपति के वाहन मूषक का दिया उदाहरण
भगवान गणेश के वाहन मूषक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मूषक काटने का काम करता है, लेकिन भगवान गणेश ने उसी को अपना वाहन बना लिया। इसके माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि किसी के गुण-दोष के आधार पर उसे कमतर नहीं आंकना चाहिए, बल्कि सही दिशा और उद्देश्य के साथ उसका उपयोग किया जा सकता है।ही मार्गदर्शन और उद्देश्य मिले, तो हर किसी की ऊर्जा का सही दिशा में सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है।
