शहर

एनकाउंटर के बाद कैसी थी भरत तिवारी की हालत? आरा सदर अस्पताल के सर्जन का आया बयान; लगी थीं 4 से 5 गोलियां

भरत तिवारी का इलाज सबसे पहले आरा सदर अस्पताल के जिस डॉक्टर ने किया था। उन्होंने बताया कि उसे चार से पांच गोलियां लगी थीं।

Image

आरा सदर अस्पताल के सर्जन डॉ. एच.एम. अंसारी

बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा सदर अस्पताल के सर्जन डॉ. एच.एम. अंसारी का बयान सामने आया है, जिसने एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी की चोटों और उसकी चिकित्सीय स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। डॉ. अंसारी उन पहले चिकित्सकों में शामिल थे जिन्होंने एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी का प्राथमिक उपचार किया था।

भरत तिवारी को लगी थीं 4 से 5 गोलियां

डॉ. अंसारी के अनुसार, भरत तिवारी को कुल 4 से 5 गोलियां लगी थीं। गोलियां मुख्य रूप से दोनों पैरों और पेट (एब्डोमेन) के निचले हिस्से में लगी थीं। मिली जानकारी के मुताबिक, एक पैर में तीन गोलियां लगी थीं, जिनमें दो गोलियां घुटने के नीचे और एक गोली घुटने के ऊपर लगी थी। इसके अलावा पेट के निचले हिस्से में एक गोली लगी थी। दूसरे पैर में भी घुटने के नीचे एक गोली लगने की पुष्टि हुई है।

डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी के पेट के ऊपरी हिस्से, सीने या शरीर के अन्य महत्वपूर्ण ऊपरी अंगों में कोई गोली नहीं लगी थी। हालांकि, गोलियों से हुए गंभीर घावों के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

डॉ. अंसारी के मुताबिक जब भरत तिवारी को आरा सदर अस्पताल लाया गया, तब उसका ब्लड प्रेशर और पल्स काफी कम था। उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई थी। प्राथमिक जांच और उपचार के दौरान ही चिकित्सकों को उसकी हालत नाजुक नजर आई, जिसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए तत्काल पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया गया।

बताया जाता है कि पीएमसीएच में इलाज के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। एनकाउंटर को लेकर जारी चर्चाओं के बीच डॉ. अंसारी का यह बयान मामले में चिकित्सकीय तथ्यों को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article