उत्तराखंड के चमोली जिले में लगभग 3000 मीटर (9000 फीट से अधिक) ऊंचाई पर बसा औली इन दिनों भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ को लेकर चर्चा में है। कल यानी मंगलवार 15 सितंबर से शुरू हुए इस अभ्यास के 22वें संस्करण का उद्घाटन औली के फॉरेन ट्रेनिंग नोड (Foreign Training Node) में हुआ। यह अभ्यास औली के साथ राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी आयोजित किया जा रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के 600-600 जवान इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
बता दें कि औली की पहचान सिर्फ एक सैन्य प्रशिक्षण स्थल तक सीमित नहीं है। चीन बॉर्डर के काफी करीब होने के चलते इसका अपना अलग महत्व है। हिमालय की ऊंचाई पर स्थित यह इलाका एक तरफ ITBP के लिए हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग का अहम केंद्र रहा है, तो दूसरी तरफ देश के प्रमुख स्की रिसॉर्ट और पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
औली का ITBP से क्या कनेक्शन है?
औली और आसपास का क्षेत्र भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP की पर्वतीय ट्रेनिंग के लिहाज से अहम है। ITBP के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक हाई ऑल्टीट्यूड डिफेंस एंड सर्वाइवल अकेडमी (HADSA) के तहत औली में विंटर क्राफ्ट विंग स्थापित किया गया था। यहां जवानों को स्कीइंग, पर्वतारोहण, सर्वाइवल और हिमालयन रेंजर से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है।
औली की ऊंचाई और कठिन पहाड़ी परिस्थितियां इसे ऐसी ट्रेनिंग के लिए उपयोगी बनाती हैं, जहां जवानों को बर्फ, कम तापमान, ढलानों और ऊंचाई वाले इलाके में काम करने की परिस्थितियों की ट्रेनिंग कराई जाती है।
भारत-अमेरिका के ‘युद्ध अभ्यास’ में औली क्यों?
इस बार औली में आयोजित Yudh Abhyas 2026 में पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अभ्यास का फोकस पैदल सेना आधारित अभियानों, संयुक्त योजना, संचालन और दोनों सेनाओं के बीच इंटेरोपर्बिलिटी बढ़ाने पर है।
अभ्यास में ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम के जरिए सर्विलांस और टोह लेने (Reconnaissance) की ट्रेनिंग भी शामिल है। वहीं राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
औली की पर्यटन के क्षेत्र में भी खास पहचान
सैन्य महत्व के साथ औली देश के प्रमुख विंटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन में शामिल है। यह लगभघ 2500 से 3050 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित है और सर्दियों में स्कीइंग के लिए खास पहचान रखता है।
औली में भारत की FIS-approved ski slopes हैं और साल 2011 में यहां पर साउथ एशियन विंटर गेम्स का आयोजित हो चुका है। यहां से नंदा देवी, कामेट और अन्य हिमालयी चोटियों का नजारा भी खास होता है।
जोशीमठ से जुड़ा है औली
औली का प्रवेश द्वार यहां का करीबी कस्बा जोशीमठ है। बद्रीनाथ और फूलों की घाटी जाने वाले यात्रियों के लिए भी जोशीमठ अहम आधार शिविर की तरह है। यहीं से औली तक सड़क और रोपवे के जरिए पहुंचा जा सकता है। चीन बॉर्डर के करीब औली की स्ट्रैटजिक लोकेशन, ITBP की ट्रेनिंग और पर्यटन, तीनों ने इसे हिमालय के एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में पहचान दी है।
