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'शिक्षा का मकसद सिर्फ करियर नहीं, आदर्श नागरिक तैयार करना भी...', टाइम्स नाउ के एजुकेशन समिट में बोले मनसुख मांडविया

TIME NOW Education Summit 2026: केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने टाइम्स नाउ के खास कार्यक्रम में शिक्षा के मौजूदा मॉडल, परिवार और शिक्षकों की भूमिका, युवाओं की जिम्मेदारी और विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से बात की।

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'शिक्षा का मकसद सिर्फ करियर नहीं, आदर्श नागरिक तैयार करना भी...', टाइम्स नाउ के एजुकेशन समिट में बोले मनसुख मांडविया

TIME NOW Education Summit 2026: केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को टाइम्स नाउ नेटवर्क के 'TimesNow.in एजुकेशन समिट 2026: ग्लोबल टैलेंट की अगली पीढ़ी का निर्माण' कार्यक्रम में शिक्षा के मौजूदा मॉडल, परिवार और शिक्षकों की भूमिका, युवाओं की जिम्मेदारी और विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से बात की।

केंद्रीय श्रम और रोजगार, युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मजाकिया अंदाज में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे विचार आया कि मैं एजुकेशन समिट में क्या बोलूंगा? मैं कोई प्रोफेसर, वाइस चांसलर तो नहीं हूं, लेकिन हम नेताओं को मंच मिलने पर भाषण देने का अधिकार जरूर होता है। ऐसे में मैंने सोचा कि मैं किस भूमिका रहूंगा।

'शिक्षा सिर्फ करियर तक सीमित नहीं'

मांडविया ने शिक्षा महज स्कूल, कॉलेज, परसेंटेज और करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं अधिक व्यापक विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को केवल शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी मानकर सीमित नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि हर देश का अपना मॉडल होता है... किसी भी देश को अपना भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अपनी विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए, क्योंकि विरासत दिशा और दर्शन दोनों प्रदान करती है। इस दौरान उन्होंने उज्बेकिस्तान का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 1992 में फेडरल रशिया से स्वतंत्र होने के बाद उसने सबसे पहले अपनी नष्ट की गई संस्कृति, इतिहास और विरासत को पुनर्स्थापित किया।

'सर्वश्रेष्ठ अपनाने के चक्कर में अपना बेस्ट न भूलें'

उन्होंने कहा, ''आजाद होने के बाद उज्बेकिस्तान ने अपनी विरासत को पुनर्स्थापित करने का काम सबसे पहले किया।'' उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो हमारे नीति निर्धारकों की मंशा सही थी और उन्होंने दुनिया से सर्वश्रेष्ट अपनाने की कोशिश की, लेकिन इस प्रक्रिया में भारत का अपना जो सर्वश्रेष्ठ और समग्र (होलिस्टिक) मॉडल था, हम उसे भूल गए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पारंपरिक भारतीय शिक्षा मॉडल में परिवार बच्चे का पहला प्राथमिक विद्यालय होता है। वर्तमान में केवल अधिक फीस और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर बेस्ट स्कूल की परिभाषा तय कर दी गई है। बच्चे पर सबसे गहरा प्रभाव उसके परिवार का और फिर उसके शिक्षक का होता है।

उन्होंने अपनी बेटी का व्यक्तिगत उदाहरण साझा किया कि कैसे बच्चे अपने शिक्षक की बात को अंतिम सत्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को मिलकर बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

'आदर्श नागरिक बनाना हमारा लक्ष्य'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) एक मार्गदर्शक सिद्धांत प्रस्तुत करती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल सिलेबस पूरा करना या डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनाना नहीं है, बल्कि सबसे पहले नेशन फर्स्ट की भावना से युक्त एक आदर्श व जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि चाणक्य ने कहा था कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके शिक्षक की गोद में पलता है... आज शिक्षक जो चाहेगा वैसा इस देश का भविष्य बनता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पेशेवर जीवन में सफल है, लेकिन पारिवारिक या सामाजिक जीवन में असफल है, तो यह शिक्षा का संकट है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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