DTC Bus Strike: राजधानी दिल्ली में बुधवार को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उस समय पूरी तरह चरमरा गई, जब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बस ड्राइवरों ने अचानक हड़ताल का रास्ता चुन लिया। ड्राइवरों के काम बंद करने की वजह से सैकड़ों बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं और सड़कों के किनारे ही खड़ी नजर आईं। इस अचानक हुई हड़ताल ने रोजाना बसों से सफर करने वाले लाखों आम मुसाफिरों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया, जिससे पूरे शहर के बस स्टॉप्स पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई।
हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि पिछले दो सालों से उनके वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। फिलहाल उन्हें महज 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। ड्राइवरों का गंभीर आरोप है कि इस मामूली राशि में से भी उन्हें अपनी वर्दी (ड्रेस) और जूतों का खर्च खुद उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं, अगर सड़क पर बस में कोई छोटी-मोटी टूट-फूट या खराबी हो जाए, तो उसका हर्जाना भी उन्हीं की जेब से वसूला जाता है।
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प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि आज के दौर में एक साधारण दिहाड़ी मजदूर भी रोजाना करीब एक हजार रुपये कमा लेता है। इसके उलट, वे एक भारी-भरकम वाहन चलाते हैं और दर्जनों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी संभालते हैं। ड्राइवरों का सवाल है कि जब श्रम विभाग ने कुशल (स्किल्ड) और अकुशल (अनस्किल्ड) श्रेणियों के तहत मजदूरी तय की है, तो एक हुनरमंद ड्राइवर को उसकी योग्यता के मुताबिक वाजिब वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा? उनकी सबसे प्रमुख मांग 'समान काम के लिए समान वेतन' लागू करने की है।
इस हड़ताल का सबसे सीधा और बुरा असर आम जनता पर पड़ा है। दफ्तर, स्कूल और कॉलेज जाने वाले लोगों को मजबूरी में महंगे ऑटो, कैब या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, दिल्ली सरकार की योजना के तहत बसों में मुफ्त सफर करने वाली महिला यात्रियों को भी इस हड़ताल के चलते भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और डीटीसी प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कब तक ड्राइवरों से बात करके इस समस्या का हल निकालते हैं।
