Assembly Elections 2026: असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू होने के बाद से प्रवर्तन एजेंसियों ने रिकॉर्ड तोड़ जब्ती की है, जिसने पिछले कई चुनावों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चुनावी प्रलोभनों के खिलाफ अभियान में अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध सामग्री और नकदी जब्त की जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी तमिलनाडु (करीब 599 करोड़ रुपये) और पश्चिम बंगाल (करीब 472 करोड़ रुपये) की रही है। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इन दोनों राज्यों में निगरानी को चरम पर रखा गया है।
क्या-क्या हुआ बरामद?
आयोग की जब्ती कार्रवाई में बरामदगी चौंकाने वाली रही। इसमें लगभग 127 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी मिली, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु से जुड़ा है। करीब 106 करोड़ रुपये मूल्य की 40 लाख लीटर से अधिक शराब जब्त हुई, जिसमें बंगाल सबसे आगे रहा। इसके अलावा 184 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ पकड़े गए, जिससे युवाओं और मतदाताओं को नशे के जरिए प्रभावित करने की कोशिश नाकाम हुई। लगभग 215 करोड़ रुपये कीमती धातुएं जैसे सोना और चांदी बरामद की गईं। वहीं, साड़ियां, बर्तन और अन्य उपहारों के रूप में 437 करोड़ रुपये की फ्रीबीज भी जब्त की गईं। यह पूरी बरामदगी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले साधनों पर सख्त कार्रवाई का संकेत देती है।
तकनीक के जरिए सख्त पहरा
इस बार चुनाव आयोग 'इलेक्शन सीजर मैनेजमेंट सिस्टम' (ESMS) का उपयोग कर रहा है, जिससे रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग संभव हो रही है। जमीन पर 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड (FST) और 5,300 से अधिक स्टेटिक सर्विलांस टीमें (SST) तैनात हैं। आयोग ने 'सी-विजिल' (C-Vigil) ऐप के जरिए भी हजारों शिकायतों का निपटारा किया है, जिसमें 95% से अधिक मामलों का समाधान महज 100 मिनट के भीतर किया गया।
'प्रलोभन मुक्त' चुनाव पर जोर
मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट संदेश दिया है कि धनबल और बाहुबल के जरिए लोकतंत्र को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां एक ओर सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध गोदामों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर पैनी नजर रख रही हैं, वहीं आयकर विभाग और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर बड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
