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आर्टिकल 370 के 7 साल: भारतीय कश्मीर में विकास की बयार, PoJK में हिंसा और हाहाकार

आर्टिकल 370 हटने के सात साल बाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां भारतीय कश्मीर में बेहतर सड़कों, टूरिज्म, नई रेल लाइनों और रोजगार के मौकों से शांति और विकास आया है, वहीं दूसरी तरफ PoJK में महंगाई, अधिकारों के हनन और सरकारी सख्ती के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं।

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भारतीय कश्मीर में बिछ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल

Photo : ANI

आर्टिकल 370 के हटने के बाद पिछले सात सालों में कश्मीर घाटी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अगर आप सीमा के दोनों तरफ के हालात को देखें, तो आपको दो अलग-अलग दुनिया नजर आएगी। एक तरफ जम्मू-कश्मीर में लगातार बनते नए पुल, चमचमाती सड़कें और पर्यटकों की चहल-पहल है, तो दूसरी तरफ PoJK में लोग अपने हक और बेसिक सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद से जमीनी स्तर पर काफी बदलाव आए हैं। श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है। इससे स्थानीय होटल मालिकों, टैक्सी ड्राइवरों, हस्तशिल्प कारीगरों और छोटे व्यापारियों की कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। नई रेल लाइनों के जुड़ने, बेहतर अस्पतालों के बनने और नए शिक्षण संस्थानों के खुलने से आम लोगों का जीवन पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित हुआ है। घाटी में खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल लौटने से युवाओं को नए रास्ते मिल रहे हैं।

जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी

इसके ठीक उलट, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। वहां महंगाई, बेरोजगारी और बिजली के भारी दामों से तंग आकर आम नागरिक बड़े पैमाने पर आंदोलन कर रहे हैं। हाल ही में रावलकोट के चिनार चौक पर हुए प्रदर्शनों के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में कई लोगों की जान चली गई। स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें कई लोग शहीद हुए और सैकड़ों घायल हुए।

इसके अलावा, मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। 'जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) के वरिष्ठ नेता शौकत नवाज मीर को गिरफ्तार किए जाने के बाद से उनके परिवार या वकीलों से नहीं मिलने दिया गया है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है। कुल मिलाकर, एलओसी (LoC) के इस पार जहां भारतीय कश्मीर आर्थिक मजबूती और शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी पार का इलाका नागरिक अधिकारों की लड़ाई और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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