Ambala Shamli Expressway: देश में हर तरफ एक्सप्रेसवे निर्माण का काम जोर-शोर से चल रहा है। यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ देश को रफ्तार दे रहे हैं, बल्कि देश की नई लाइफलाइन और पहचान भी बन रहे हैं। अभी देश में लोगों को जिन एक्सप्रेसवे का काम पूरा होने का सबसे ज्यादा इंतजार है, उनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसेवे और अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे का भी नाम शामिल है। तो चलिए जानते हैं लगभग 121 किमी लंबे अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे का काम कितना कितना पूरा हो गया है और आप कब इस पर फर्राटा मार पाएंगे।
हरियाणा में अंबाला से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली तक बन रहा नया छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भविष्य में उत्तर भारत की रोड कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकता है। लगभग 121 किमी लंबे इस हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस एक्सप्रेसवे का काम पूरा होने और जनता के लिए खोले जाने के बाद अंबाला से शामली के बीच लगभग तीन घंटे का सफर घटकर महज 90 मिनट रह जाने की उम्मीद है।
Ambala-Shamli Expressway की लागत कितनी?
अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे की अनुमानित लागत लगभग ₹4900 करोड़ है। इस कॉरिडोर को भारतमाला परियोजना के तहत NHAI बना रहा है और इसके निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। एक अनुमान के मुताबिक इसका 70 फीसद काम पूरा हो चुका है। मौजूदा लक्ष्य के अनुसार इसका निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।
यूपी-हरियाणा के इन जिलों में बन रहा एक्सप्रेसवे
अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा हरियाणा और बाकी उत्तर प्रदेश में बनाया जा रहा है। यह हरियाणा में अंबाला क्षेत्र से शुरू होकर कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर जिलों से गुजरते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और शामली जिलों को जोड़ते हुए बनाया जा रहा है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित कई प्रोजेक्ट से होगा कनेक्ट
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से मिलेगी कनेक्टिविटी
इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे खास बात इसका इंटरकनेक्टेड रोड नेटवर्क है। शामली जिले के गोगवान जलालपुर क्षेत्र में इसे पहले से ही ऑपरेशन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से कनेक्ट करने की योजना है। ऐसा होने पर हरियाणा और पंजाब की तरफ से उत्तराखंड तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों को एक तेज और बेहतर विकल्प मिल सकता है। इस एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर, अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे, अंबाला-मोहाली एक्सप्रेसवे और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से भी कनेक्टिविटी मिलेगी।
90 मिनट में पूरा होगा तीन घंटे का सफर
फिलहाल अंबाला से शामली आने-जाने के लिए यात्रियों को लंबा रूट लेना पड़ता है। सड़क मार्ग और ट्रैफिक के आधार पर इस सफर में अभी लगभग तीन घंटे या इससे भी ज्यादा समय लग जाता है। नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद अंबाला और शामली के बीच सफर लगभग 90 मिनट में पूरा हो जाएगा। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ कारोबारी और माल ढुलाई क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।
उद्योग और कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार
अंबाला औल शामली के बीच बन रहा यह कॉरिडोर सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। अंबाला की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां, यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि व चीनी उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था को बेहतर सड़क संपर्क मिल सकता है। तेज और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर से माल ढुलाई में समय की बचत, ईंधन खपत में कमी और लॉजिस्टिक्स को भी रफ्तार मिलने की संभावना है।
कनेक्टिविटी का दूसरा नाम होगा ये कॉरिडोर
अंबाला-शामली कॉरिडोर के जरिए पंजाब और हरियाणा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे आगे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और अन्य प्रस्तावित व मौजूदा हाईवे नेटवर्क से जुड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ सकता है। बड़े सड़क नेटवर्क के जरिए राजस्थान सहित अन्य राज्यों की ओर आने-जाने वाले वाहनों को भी इससे वैकल्पिक और तेज कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेस्ट एरिया, पेट्रोल पंप, रेस्ट एरिया और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी प्रावधान किया जा रहा है। मार्च 2027 तक इस प्रोजेक्ट का काम पूरा होने की उम्मीद है। उद्घाटन होते ही यह कॉरिडोर उत्तर भारत के उभरते हाई-स्पीड रोड नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
