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क्या चारू चौधरी की पश्चिमी यूपी की सियासत में हो रही एंट्री, जयंत का दांव कैसे बन सकता है डिंपल यादव की काट?

पश्चिमी यूपी के सियासी जानकार इसे जयंत चौधरी का एक सोचा-समझा रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जो सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव की काट बन सकता है।

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क्या डिंपल यादव को चुनौती देंगी चारू चौधरी?
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Sep 10, 2026, 14:57 IST
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। हाल ही में सहारनपुर की ‘स्वाभिमान रैली’ में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी ने पहली बार सीधे राजनीतिक मंच संभाला। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के 'चवन्नी से रुपया बनाया' वाले तंज पर चारू चौधरी का 'चवन्नी' जवाब और 'चौधराहट में मेरा ब्याह हुआ है' वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में है। लेकिन यह सिर्फ एक बयान या पारिवारिक बचाव नहीं है। पश्चिमी यूपी के सियासी जानकार इसे जयंत चौधरी का एक सोचा-समझा रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जो सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव की काट बन सकता है। किस तरह से जयंत का दांव यूपी में नए समीकरण साध सकता है, जानने की कोशिश करते हैं।

क्या था 'चवन्नी' विवाद और चारू का पलटवार?

पिछले दिनों अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी का नाम लिए बिना तंज कसा था कि "कहां-कहां से आ गए थे, हमने चवन्नी से रुपया बना दिया, फिर भी छोड़कर (NDA में) चले गए।" RLD और पश्चिमी यूपी के जाट समाज ने इस बयान को चौधरी चरण सिंह की विरासत और जाटों के आत्मसम्मान का अपमान माना। सहारनपुर रैली में चारू चौधरी ने मंच से कहा, मेरी शादी इस चौधराहट वाले परिवार में हुई है। मुझे इस परिवार पर, जाट समाज पर और अपने पति जयंत पर गर्व है... किसी को किसी का अपमान करने का अधिकार नहीं है, ऐसी बातें बोलने वाले की सोच का पता चलता है।

डिंपल यादव की काट चारू चौधरी?

समाजवादी पार्टी में डिंपल यादव सिर्फ अखिलेश यादव की पत्नी नहीं हैं, बल्कि पार्टी का एक बड़ा, सौम्य और स्वीकार्य महिला चेहरा हैं। मैनपुरी, कन्नौज और अब पूरे यूपी में महिलाओं को जोड़ने में डिंपल अहम भूमिका निभाती हैं। अखिलेश अक्सर आक्रामक रुख अपनाते हैं, जबकि डिंपल का लहजा संयमित और संवाद बनाने वाला होता है।

जयंत चौधरी ने अब इसी जेंडर और फैमिली कार्ड के जरिए संतुलन बनाने का दांव खेला है।

सौम्य और मजबूत पारिवारिक चेहरा

डिंपल यादव की तरह चारू चौधरी भी एक शिक्षित, आधुनिक और पढ़े-लिखे (फैशन और जेमोलॉजी पृष्ठभूमि) परिवार से आती हैं। जयंत चौधरी का राजनीतिक अंदाज अक्सर संयमित और रक्षात्मक नजर आता है, लेकिन चारू चौधरी ने मंच से आकर सीधे महिला संवेदना और परिवार के स्वाभिमान को जोड़कर एक नया समीकरण पेश किया है।

पश्चिमी यूपी में 'बहू' और 'चौधराहट' का कनेक्शन

जाट बाहुल्य पश्चिमी यूपी (मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत आदि) में 'चौधराहट' का बहुत बड़ा सामाजिक महत्व है। चारू चौधरी का यह कहना कि 'मेरी शादी चौधराहट में हुई है' सीधे तौर पर खाप पंचायतों, ग्रामीण महिलाओं और जाट वोट बैंक के स्वाभिमान को छूता है। यह संदेश देता है कि जब चौधरी चरण सिंह के परिवार के सम्मान की बात आएगी, तो घर की बहू भी मैदान में उतरेगी।

महिला मतदाताओं तक पहुंच का जरिया

सपा के पास डिंपल यादव के रूप में आधी आबादी यानी महिला वोटरों को साधने का मजबूत जरिया है। चारू चौधरी का सक्रिय होना RLD को पश्चिमी यूपी की महिला मतदाताओं, खासकर युवा और शिक्षित वर्ग के बीच एक स्वाभाविक जुड़ाव बनाने का अवसर देता है।

चारू चौधरी की पृष्ठभूमि और पर्दे के पीछे की भूमिका

चारू चौधरी एक फैशन डिजाइनर हैं और उन्होंने जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका (GIA) से पढ़ाई की है। 2003 में जयंत चौधरी से शादी के बाद वे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत चौधरी अजीत सिंह के परिवार का हिस्सा बनीं। अजीत सिंह ने ही उन्हें RLD का स्टार प्रचारक बनाया था। चारू लंबे समय से RLD के बैक-एंड मैनेजमेंट, सोशल मीडिया विंग और जयंत चौधरी के चुनावी अभियानों की साइलेंट पावर रही हैं। अब वे पर्दे के पीछे से निकलकर सीधे अग्रिम पंक्ति पर आ गई हैं।

2027 के चुनाव पर क्या होगा इसका असर?

अखिलेश के बयान को 'जाट अस्मिता' का मुद्दा बनाकर RLD ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को और मजबूत करने की कोशिश की है। सपा के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव का मुकाबला वह कर सकती हैं। अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन के जरिए सैनी, मुस्लिम और दलित वोटों को जोड़ रहे थे। चारू चौधरी की एंट्री से RLD अपने किसान-जाट-महिला आधार को दोबारा एकजुट करने में जुट गई है।

'डिंपल बनाम चारू' की नई जंग

यूपी की राजनीति में अब तक केवल मैनपुरी और यादव बेल्ट में डिंपल का प्रभाव देखा जाता था। लेकिन अब पश्चिमी यूपी में चारू चौधरी बनाम डिंपल यादव की एक नई दिलचस्प सियासी जंग देखने को मिल सकती है। अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान पर चारू चौधरी का हमला सिर्फ एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले RLD का एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। डिंपल यादव की तर्ज पर चारू चौधरी को आगे कर जयंत चौधरी ने पश्चिमी यूपी की सियासत में अपनी सामाजिक पकड़ और महिला कनेक्ट दोनों को एक साथ साधने का बड़ा कार्ड खेल दिया है।

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