अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की राशि में कथित तौर पर हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर मचे चौतरफा सियासी घमासान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए अयोध्या के विकास और वहां के नागरिकों के पारंपरिक अधिकारों को लेकर एक बड़ा संकल्प लिया है।
'अयोध्या को बनाएंगे सियाराम-धाम' - अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और माता सीता के सनातन मान को पुनर्स्थापित करने की बात कहते हुए अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि "हम धर्मनिष्ठता और सत्यनिष्ठता के साथ ये संकल्प लेते हैं कि नई सरकार बनाकर ‘अयोध्या’ को एक ऐसी अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहां विश्व भर से आए श्रद्धालु सच्ची आध्यात्मिकता की अद्वितीय अनुभूति करेंगे।
प्रभु के आशीर्वाद के साथ, हम अयोध्या के सनातन मान को आस्था-श्रद्धा, अखंड विश्वास और सच्ची भावना के ‘सियाराम-धाम’ के रूप में पुनर्स्थापित और पल्लवित करेंगे।
इससे अयोध्यावासियों के भी परंपरागत गौरवभान और अधिकारों को पुन: स्थापित करेंगे।"
कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
बता दें कि इस विवाद को लेकर सपा काफी मुखर है। राम मंदिर चंदा गबन विवाद चर्चा की शुरुआतअयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे के उन गंभीर आरोपों के बाद हुई थी जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के दानपात्रों और भक्तों द्वारा दिए गए चंदे से करीब 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
8 गिरफ्तारियां और ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों का इस्तीफा
विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है, जिसके बाद से कार्रवाई का दौर बेहद तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एक आधिकारिक FIR दर्ज की गई है। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। साथ ही विवाद के तूल पकड़ने पर चंपत राय (महासचिव) और अनिल मिश्रा (ट्रस्टी) ने नैतिक आधार पर अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है।
