आगरा

मथुरा में मालगाड़ी के 20 डिब्बे पटरी से उतरे, कोच के ऊपर चढ़ गए कोच; आगरा-दिल्ली रूट पर ट्रेनें ठप

आगरा दिल्ली रेल ट्रैक पर बड़ा हादसा हो गया। वृंदावन रोड स्टेशन से 800 मीटर आगे मालगाड़ी ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मालगाड़ी के 20 से ज्यादा कोच एक के ऊपर एक चढ़ गए।

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मथुरा में मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

मथुरा: आगरा दिल्ली रेल ट्रैक पर बुधवार की रात बड़ा हादसा हो गया। वृंदावन रोड स्टेशन से 800 मीटर आगे एक मालगाड़ी ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मालगाड़ी के 20 से ज्यादा कोच पटरी से उतरने के बाद एक के ऊपर एक चढ़ गए। ट्रेन कोयला लेकर दिल्ली की तरफ जा रही थी। हादसा थाना जैंत क्षेत्र में करीब साढ़े 9 बजे रात को हुआ है। बताया जा रहा है कि ट्रेन में इंजन सहित 59 कोच थे। किसी कारणवश इंजन निकलते ही ट्रेन डिरेल हो गई। गाड़ी के ट्रैक से उतरते ही तेज रफ्तार होने के कारण कोच एक के ऊपर एक चढ़कर पलट गए। ट्रैक पर कोयला फैल गया है। इस हादसे से दिल्ली मथुरा रेल ट्रैक बाधित हो गया है। रेलवे और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। ट्रैक को सामान्य होने में कई घंटे लग सकते हैं।

10 से 12 घंटे में सही होगा ट्रैक

रेलवे के अधिकारियों ने रेल ट्रैक दुरुस्त कर यातायात सुचारू रूप से शुरू करने की बात कह रहे हैं। हमारी सहयोगी वेबसाइट एनबीटी के मुताबिक, आगरा रेल मंडल में वृंदावन और अझई के बीच कोयला लादकर ले जा रही मालगाड़ी पटरी से उतर गई। हादसा होते ही डिब्बे आपस में टकरा कर एक दूसरे के ऊपर चढ़ गए और पलट गए, जिससे कोयला फैल गया। हादसे से बिजली सप्लाई वाले खंभे भी टूट गए हैं। बताया जा रहा है कि रेलवे को ट्रैक ठीक करने में 10 से 12 घंटे का समय लग सकता है। फिलहाल, किसी प्रकार के जनहानि नहीं हुई है, लेकिन ट्रैक बाधित होने से बड़ी संख्या में सवारी गाड़ियों को पीछे रोका गया है, जिससे यात्री खासा परेशान है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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