Finance Bill 2026 : लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद प्रिया सरोज ने सरकार पर आरोप लगाया कि जनता के लिए तय किए गए पैसे का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश इस समय अमृत काल नहीं बल्कि कर्ज काल से गुजर रहा है। प्रिया सरोज ने अपने भाषण में कहा कि सरकार के हर 100 रुपये खर्च में से करीब 26 रुपये केवल पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने में जा रहे हैं। उनका कहना था कि पिछले 12 सालों में देश पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। उन्होंने चिंता जताई कि जो पैसा गरीबों के कल्याण, किसानों की मदद और बच्चों की शिक्षा पर खर्च होना चाहिए, वह कर्ज चुकाने में लग रहा है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ऊपर से बजट भले अच्छा दिखता हो, लेकिन आम लोगों की जेब पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
कॉरपोरेट टैक्स कटौती पर भी निशाना
सपा सांसद ने साल 2019 में कॉरपोरेट टैक्स घटाने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के लिए टैक्स दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई, जिससे उन्हें हर साल भारी राहत मिलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस राहत की भरपाई आखिर किस तरह की जा रही है। उनका इशारा इस ओर था कि इसका बोझ कहीं न कहीं आम जनता पर पड़ रहा है।
विनिर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ पर सवाल
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक प्रिया सरोज ने यह भी दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का हिस्सा बढ़ने के बजाय घट रहा है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई उत्पादों में बड़ी मात्रा में सामान विदेशों, खासकर चीन से आयात किया जाता है। ऐसे में उसे असली मैन्युफैक्चरिंग नहीं बल्कि केवल असेंबलिंग कहा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन शुरू होने के बावजूद भारत अभी भी चिप्स के लिए विदेशों पर निर्भर है।
अन्य सांसदों ने भी उठाए मुद्दे
चर्चा में अन्य दलों के सांसदों ने भी अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आजाद ने नोटबंदी, बढ़ती बेरोजगारी, एलपीजी की कीमतों और एमएसएमई सेक्टर की परेशानियों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि वित्त विधेयक में इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
आम आदमी की हालत पर चिंता
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने सरकार के आर्थिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो आम आदमी की जेब खाली क्यों होती जा रही है। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर लोगों को आर्थिक राहत महसूस नहीं हो रही है।
अनुसंधान और आयात पर भी चर्चा
तेलुगु देशम पार्टी के लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने देश के अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के उपग्रहों में इस्तेमाल होने वाले 50-55 प्रतिशत उपकरण विदेशों से आयात किए जाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश को बजट के साथ-साथ रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी ज्यादा खर्च करने की जरूरत है, ताकि आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
कुल मिलाकर, लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर हुई चर्चा में विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों, बढ़ते कर्ज, रोजगार, उद्योग और आम आदमी की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए। वहीं, इन मुद्दों पर सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
