आईटी स्टॉक्स में मची भगदड़, TCS, Infosys के साथ निफ्टी IT भी 1 महीने में 17% डूबा, क्या खरीदने का सही मौका?
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Feb 18, 2026, 02:09 PM IST
Nifty IT इंडेक्स पिछले एक महीने में 17 फीसदी के करीब टूट चुका है। वहीं, इस दौरान TCS और इन्फोसिस जैसे दिग्गज आईटी स्टॉक्स में भी 18 फीसदी तक की गिरावट आई है। आखिर क्यों आईटी स्टॉक्स में लगातार बिकवाली जारी है और इसकी वजह डारने वाली क्यों है?
आईटी स्टॉक्स में गिरावट क्यों
शेयर बाजार के बड़े और अहम इंडेक्स में शामिल Nifty IT में बुधवार को 2 फीसदी के करीब गिरावट है। इंडेक्स में शामिल सभी 10 स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। पिछले 7 सत्र में यह इंडेक्स 7 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है, यह गिरावट तब है, जब मंगलवार को आईटी इंडेक्स में करीब 3 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी। वहीं, पिछले एक महीने की स्थिति पर देखें, तो पूरा इंडेक्स 17 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है, जबकि TCS और इन्फोसिस में करीब 18 फीसदी की गिरावट आई है।
AI वाली डील क्यों काम नहीं आई?
IT सेक्टर को AI से खतरा बताया जा रहा है। खासतौर पर एंथ्रोपिक के एआई एजेंट्स से, लेकिन इन्फोसिस और TCS दोनों ही कंपनियों दुनिया की लीडिंग AI कंपनियों के साथ हाथ मिला चुकी हैं। मंगलवार को इन्फोसिस ने एंथ्रोपिक से हाथ मिलाया, जिसके बाद स्टॉक में हल्की तेजी देखने को मिली। लेकिन, ओवरऑल अब भी ट्रेंड नेगेटिव बना हुआ है। इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि असल वजह AI नहीं, बल्कि AI की वजह से कमाई पर आने वाला असर है। किसी भी कंपनी के लिए कर्मचारियों को नौकरी से निकालना बड़ी बात नहीं है, असली चुनौती AI का इंट्रीग्रेशन, इस पर आने वाली कॉस्ट और इस कॉस्ट की रिकवरी के बाद प्रॉफिट को लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। यही निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
थकने लगे हैं ग्रोथ के घोड़े
भारतीय शेयर बाजार में IT Sector लंबे समय से लीडिंग फोर्स रहा है। TCS, Infosys, Wipro और HCL जैसी कंपनियों ने देश की इकोनॉमी में अरबों रुपये का योगदान देते हुए पिछले 2-3 दशक में लाखों लोगों को रोजगार दिया है। लेकिन, अब यह पूरा सेक्टर एक ऐसे खतरे का सामना कर रहा है, जहां इन कंपनियों की कमाई को लेकर चिंता है। दशकों से डबल डिजिट में ग्रोथ और प्रॉफिट हासिल कर रहीं इन कंपनियों की ग्रोथ अब थमने लगी है।
आईटी शेयरों में बिकवाली तेज
अमेरिकी टेक मांग और वैश्विक आईटी खर्च को लेकर अनिश्चितता के बीच मंगलवार को आईटी शेयरों में चौतरफा दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स 495 अंकों की गिरावट के साथ 32,579.65 पर बंद हुआ, जो 1.50% की कमजोरी दर्शाता है। इंडेक्स के सभी 10 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इंडेक्स का ओपन 33,133.85 पर हुआ था जबकि पिछला बंद 33,075.05 रहा। दिनभर के कारोबार में वॉल्यूम 380.24 लाख शेयर रहा और कुल ट्रेड वैल्यू 4,101 करोड़ रुपये के करीब दर्ज हुई। इंडेक्स का P/E 23.50 और P/B 6.14 पर बना हुआ है, जो सेक्टर के वैल्यूएशन को अभी भी प्रीमियम जोन में दिखाता

इमेज क्रेडिट, NSE
है।
पूरे सेक्टर में सेलिंग
आज की गिरावट में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप आईटी शेयरों में ज्यादा दबाव दिखा। LTIMindtree और Tech Mahindra जैसे शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई, जबकि Wipro और Persistent Systems भी 2% के आसपास टूटे। बाजार आंकड़ों के मुताबिक इंडेक्स में किसी भी स्टॉक में बढ़त नहीं दिखी और पूरे इंडेक्स में गिरावट का दबाव बना रहा।
पिछले रिटर्न भी दबाव में
आईटी इंडेक्स के रिटर्न भी हालिया कमजोरी को दिखाते हैं। 1 महीने में इंडेक्स लगभग 16.65% गिरा है, जबकि 1 साल में गिरावट 21% से ज्यादा है। हालांकि 3 साल और 5 साल की अवधि में अभी भी सकारात्मक रिटर्न दिख रहा है।
| स्टॉक | भाव (₹) | बदलाव | % गिरावट | वैल्यू (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|---|
| Infosys | 1,372.60 | -18.60 | -1.34% | 2,090.12 |
| TCS | 2,691.60 | -25.80 | -0.95% | 584.26 |
| HCL Tech | 1,463.50 | -19.10 | -1.29% | 209.34 |
| Tech Mahindra | 1,491.10 | -32.70 | -2.15% | 167.07 |
| Wipro | 210.98 | -4.71 | -2.18% | 320.31 |
| Persistent | 5,511.00 | -117.00 | -2.08% | 256.99 |
| LTIM | 5,031.50 | -133.00 | -2.58% | 105.71 |
| Coforge | 1,362.30 | -16.50 | -1.20% | 248.11 |
| Mphasis | 2,416.10 | -49.10 | -1.99% | 55.15 |
| OFSS | 6,724.50 | -120.50 | -1.76% | 56.77 |
क्या निवेश का सही मौका?
मार्केट एक्सपर्ट विजय मंत्री के मुताबिक भारतीय IT सेक्टर में ग्रोथ धीमी रह सकती है और इंडेक्स में 15–20% तक और गिरावट संभव है। विजय मंत्री का कहना है कि वह लंबे समय से आईटी सेक्टर को लेकर सावधान रहे हैं। 2020 के आसपास लिस्टेड कंपनियों के कुल प्रॉफिट पूल में आईटी का योगदान करीब 23% था, जो अब घटकर लगभग 8% पर आ गया है। इसका मतलब साफ है कि अब बाजार की ग्रोथ केवल आईटी पर निर्भर नहीं है। एआई को भले ही नई चुनौती माना जा रहा हो, लेकिन उनके मुताबिक असली दबाव ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और धीमी डिमांड से आ रहा है। भर्ती में सुस्ती, हाई वैल्यूएशन और सिंगल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ ने सेक्टर की चमक कम कर दी है। मंत्री का आकलन है कि आईटी इंडेक्स में अभी भी 15–20% तक और गिरावट की गुंजाइश बन सकती है और आने वाले समय में कमाई की ग्रोथ लगभग शून्य भी रह सकती है। इसके साथ ही उनका कहना है कि जहां एआई कुछ सेक्टरों के लिए चुनौती है, वहीं यह ऊर्जा खपत को तेजी से बढ़ा रहा है। भारत बिजली उत्पादन में चीन की बराबरी की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े अवसर बन सकते हैं।
कहां बनेंगे निवेश के अवसर?
मंत्री के मुताबिक असली अवसर अब मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, एनर्जी, हेल्थकेयर और कंजम्प्शन सेक्टर में बन रहा है। करीब 700 लिस्टेड कंपनियों ने निजी कैपेक्स में 13% की बढ़ोतरी की है, जो छह साल का उच्च स्तर है। खासकर ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, मेटल और माइनिंग सेक्टर निवेश बढ़ा रहे हैं। बैंकों में भी लंबे समय बाद डबल डिजिट क्रेडिट ग्रोथ लौट आई है, जो अर्थव्यवस्था में निवेश चक्र के मजबूत होने का संकेत देती है। अगले पांच वर्षों में ग्लोबल GDP ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी 16% तक पहुंच सकती है। युवा आबादी, बढ़ती आय और कंजम्प्शन पैटर्न में बदलाव लंबी अवधि की ग्रोथ को सपोर्ट कर रहे हैं। हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में भी अवसर बढ़ रहे हैं, क्योंकि लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और हेल्थ खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है। मंत्री का कहना है कि केवल निफ्टी 50 को देखकर बाजार की दिशा समझना अब पर्याप्त नहीं है। असली ग्रोथ कहानी कई बार इंडेक्स के बाहर बनती है। लार्ज कैप निवेश से GDP के बराबर 10–12% रिटर्न मिल सकता है, लेकिन 15% या उससे ज्यादा रिटर्न के लिए मिड और स्मॉल कैप में चयनात्मक निवेश जरूरी होगा।
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