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‘Buy Buy’ की जगह क्यों कहना पड़ा ‘Bye Bye’? शेयर बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें जानें

शेयर बाजार में सितंबर सीरीज के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। Nifty ने 25 साल में सितंबर का सबसे खराब प्रदर्शन किया। कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

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‘Buy Buy’ की जगह क्यों कहना पड़ा ‘Bye Bye’? शेयर बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें जानें

मंगलवार यानी 29 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, हालांकि दिन के निचले स्तर से बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। Sensex 243 अंक गिरकर 72,529 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 64 अंक की गिरावट के साथ 22,716 के स्तर पर रहा। Nifty 22,700 के स्तर के ऊपर बना रहा, लेकिन सितंबर सीरीज में इसका प्रदर्शन पिछले 25 साल में सबसे कमजोर रहने की ओर बढ़ रहा है। इस सीरीज में Nifty करीब 7 फीसदी नीचे है। मंगलवार के कारोबार में Nifty IT Index पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। IT कंपनियों के शेयर कमजोर रहे और Nifty IT इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिर गया। Wipro Nifty के सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहा। IT सेक्टर में बिकवाली का असर पूरे इंडेक्स पर दिखाई दिया और बाजार की रिकवरी के बावजूद यह सेक्टर दबाव में रहा।

निफ़्टी का सबसे ख़राब प्रदर्शन

मंगलवार के कारोबार में Nifty के करीब 30 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। कुछ शेयरों में गिरावट 3 फीसदी तक रही। बाजार का Advance-Decline Ratio भी गिरावट के पक्ष में रहा और यह 2:3 पर रहा। इसका मतलब है कि बाजार में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों की तुलना में ज्यादा रही।

Insurance सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी जारी रही। PB Fintech के शेयर करीब 6 फीसदी तक गिर गए, जबकि TurtleMint में लगभग 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। Tata Group के शेयरों में भी दबाव रहा। Tata Trusts के प्रस्ताव के बाद Tata Group से जुड़े कुछ शेयरों में कमजोरी देखने को मिली और Tata Chemicals करीब 4 फीसदी गिर गया।

इसके अलावा Honasa Consumer के शेयर भी करीब 5 फीसदी नीचे रहे। कंपनी के 4 फीसदी से ज्यादा Equity के Block Deals की खबर के बाद शेयर में दबाव देखने को मिला। बाजार में इस तरह की बड़ी डील पर निवेशकों की नजर रहती है और इसका असर शेयर की कीमत पर भी दिखाई दे सकता है।

दूसरी ओर, Voltas और Blue Star के शेयरों ने शुरुआती बढ़त गंवा दी और करीब 3-4 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट के पीछे कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद को एक वजह माना जा रहा है।

हालांकि, कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। BSE का शेयर कारोबार के आखिरी घंटे में करीब 3 फीसदी चढ़ गया। यह तेजी कंपनी के Nifty में शामिल होने से पहले देखने को मिली। वहीं, Dr Reddy’s Laboratories Nifty का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा। एक ब्रोकरेज की ओर से कंपनी की रेटिंग में दो स्तर का अपग्रेड किए जाने के बाद शेयर में तेजी देखने को मिली।

बाजार में इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं, लेकिन तीन बड़े कारण खास तौर पर सामने आ रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी शामिल हैं। इन तीनों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और कंपनियों के कारोबार पर पड़ सकता है, इसलिए निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजह

पहली बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमत। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है और हाल में यह करीब 107-108 डॉलर तक भी गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के Import Bill पर पड़ता है।

महंगा कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। अगर कंपनियों की Input Cost बढ़ती है और वे पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके Profit Margin पर दबाव आ सकता है। साथ ही महंगे तेल से महंगाई बढ़ने की चिंता भी बढ़ती है। इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार में अनिश्चितता पैदा होती है और शेयरों पर दबाव आ सकता है।

दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। अमेरिका में Treasury Bond की Yield बढ़ने से निवेशकों के लिए अमेरिकी Assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी 10-Year Treasury Yield करीब 5.2 फीसदी के आसपास पहुंची है। बढ़ती यील्ड का असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ता है, खासकर उन उभरते बाजारों पर जहां विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा आता है।

जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला Return बढ़ता है, तो कुछ विदेशी निवेशक Emerging Markets में अपना निवेश कम कर सकते हैं। इससे भारत जैसे बाजारों से Foreign Fund Outflow बढ़ सकता है। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए दबाव का एक कारण रही है। इससे शेयरों की कीमतों और रुपये दोनों पर असर पड़ सकता है।

तीसरी बड़ी वजह रुपये में कमजोरी है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार कर गया और करीब 96.14 तक पहुंचा। कच्चे तेल की महंगाई और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

बाजार पर दबाव पड़ा

रुपये की कमजोरी का असर भी कंपनियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। भारत को तेल और कई दूसरी जरूरी चीजों के लिए विदेशों से भुगतान करना पड़ता है। कमजोर रुपया होने पर इन आयातों की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बढ़ती है। वहीं, विदेशी निवेशकों के लिए भी कमजोर मुद्रा एक अतिरिक्त जोखिम बन सकती है। इन तीनों कारणों का असर मिलकर शेयर बाजार के Sentiment पर पड़ा है। Nifty के साथ Midcap और Smallcap शेयरों में भी लगातार दबाव देखने को मिला। Auto, Realty और PSU Bank जैसे सेक्टर सितंबर सीरीज में कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहे।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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